'ये सेल्फी नहीं, दर्दभरी कहानी है'

19 साल की सेलिन ब्रिटेन की हल यूनिवर्सिटी में क़ानून की छात्रा हैं. इस उम्र में ही वो अवसाद से पीड़ित हैं.

पिछले दिनों उन्होंने फ़ेसबुक पर अपने मेंटल हेल्थ को लेकर एक पोस्ट डाला और अपनी मुश्किलों के बारे में लिखा.

उनके इस पोस्ट पर कई लोगों ने प्रतिक्रियाएं दी और पॉजिटिव रिस्पांस के चलते इसका सेलिन पर गहरा असर हुआ.

उनकी स्थिति में सुधार हो रहा है. फिलहाल उनका इलाज कायग्नेट हॉस्पीटल हैरोगेट में चल रहा है, लेकिन उन्होंने बीबीसी से संपर्क करके अपनी कहानी बताई ताकि उनके जैसे युवाओं को अवसाद से उबरने का रास्ता मिल सके.

सेलिन की कहानी, उनकी ज़ुबानी-

मुझे जहां तक याद है, मैं दुखी रहने लगी थी, किसी काम में उत्साह से दिल नहीं लगता. दिमाग में हमेशा उल्टी बातें चलती थीं.

लोग कहते हैं कि दिमागी सेहत को हम देख नहीं सकते, लेकिन मैं इससे सहमत नहीं हूं. आप ऊपर की मेरी तस्वीरों को देख लीजिए- मानसिक स्वास्थ्य के गिरते स्तर से मेरा हुलिया कैसा हो गया.

बालों और चेहरे से ही दिखाई देता है, मैंने बाल संवारना बंद कर दिया था, मेकअप नहीं करने लगी. इतना ही नहीं ये मेरी मुस्कुराहट से भी ज़ाहिर होने लगा. आप मेरी इन चार तस्वीरों में देखे कैसा निरीह भाव आता गया है चेहरे, मदद मांगने जैसी सूरत बनती गई.

लेकिन क्या है संभव है कि जीवन पर दुखी रहा जाए? मेरे पास दो ख़ूबसूरत घोड़े हैं, जिनकी मदद से मुझे अवसाद और चिंताओं से उबरने में मदद मिल सकती है.

मेरे माता पिता, हरसंभव तरीके से मेरी मदद के लिए उपलब्ध थे. लेकिन इन सबके बावजूद मुझे कमी महसूस होती थी. कई दिन तो मुझे अपने बिस्तर से निकलने का मन ही नहीं होता. मुझे किसी बात का कोई उद्देश्य नज़र नहीं आता.

लोग मुझसे कहते थे, अरे उठो, आलस छोड़ो. लेकिन मेरी हालत को समझ पाना आसान नहीं था. जिस दिन में मैं अपने बिस्तर से बाहर निकल पाती, मुझे लगता कि गोल्ड मेडल हासिल कर लिया.

जब मेरा मनोबल बहुत कम हो जाता, तो ना केवल उदास हो जाती बल्कि छोटी छोटी बातों के लिए मुझे संघर्ष करना पड़ता. लोगों के बीच बोलना मुश्किल होने लगा था, जब तक बहुत ज़रूरी नहीं हो मैंने स्कूल जाना बंद कर दिया था.

जब लोग किसी बात पर हंसते तो मुझे लगता है कि वे लोग मुझ पर हंस रहे हैं. लोग अगर मेरी तरफ़ देख रहे होते तो मुझे लगता कि मैं ओवरवेट हो गई हूं. मैं मॉडलों जैसा सुंदर दिखने की कोशिश करती.

पर जैसे ही आइने के सामने आती, मेरा भरोसा और कम हो जाता. इन कोशिशों और इसके दबाव के चलते पिछले कुछ महीनों में मेरा वजन घट गया.

मैं अब अपने घोडों पर नहीं चढ़ पा रही थी, मुझे लग रहा था कि मैं अच्छी राइडर नहीं हूं, मुझे घोड़ा नीचे गिरा देगा. यह दबाव किसी ओलंपिक एथलीट के ऊपर होने वाले दबाव जितना होता था.

पिछले साल जब ब्वॉय फ्रेंड से ब्रेकअप हुआ तो मुझे लगा कि मैंने सबकुछ खो दिया. जीवन के प्रति कोई उत्साह नहीं रहा. मैं एक मनोचिकित्सक के पास गई, तो उन्होंने मेरे बारे में कहा कि ये भावुक ड्रामा कर रही है.

लेकिन अभी मेरा जहां इलाज़ हो रहा है, वहां के डॉक्टरों ने इसे सामान्य समस्या बताई. पहली बार किसी ने मेरी समस्या को समझा.

मैं कई ऐसे लोगों से मिली, जो मेरी तरह ही अवसाद से पीड़ित थीं. उन लोगों से बात करके मुझे राहत मिली कि मैं दुनिया में अकेली नहीं हूं.

मैं दुनिया से कहना चाहती हूं कि मैं मानसिक स्वास्थ्य संबंधी मुश्किलों का सामना कर रही हूं लेकिन मैं जल्दी ठीक हो जाऊंगी.

मुझे इसमें कोई शर्म नहीं है. लोगों को मदद मांगने में हिचकना नहीं चाहिए. मदद मांगने पर लोग आपको सायको, पागल और सनकी कुछ भी कह सकते हैं, लेकिन ऐसे वक्त में ही दोस्तों की पहचान होती है.

बहरहाल, मैं अपने दोस्तों और परिवार वालों के साथ साथ डाक्टरों का भी शुक्रिया अदा करती हूं. मेरा नाम सेलिन है, 19 साल की हूं. वकालत की पढ़ाई कर रही हूं, दो भाषाएं बोल सकती हैं, मेरे पास एक शानदार घोड़ा है और मैं मानसिक रोग का सामना कर रही हूं.

अगर आप भी मानसिक अवसाद का सामना कर रहे हों तो-

  • भरोसेमंद लोगों से अपने मन की बात कीजिए, इस पर चुप्पी ना साधें.
  • समस्या लंबे समय से हैं तो इलाज कराइए.
  • एक्सरसाइज कीजिए, पौष्टिक खाना खाइए और जिसमें मजा आए वो काम कीजिए.
  • अगर अवसाद इसके बाद भी रहता है तो आप काउंसलर या डॉक्टर से मदद लीजिए.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)