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6 देशों के लोगों को अमरीका नहीं देगा नया वीज़ा
- Author, ब्रजेश उपाध्याय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वाशिंगटन
ट्रंप प्रशासन ने सोमवार की सुबह एक नया आदेश जारी किया है जिसके तहत छह मुसलमान-बहुल देशों से अमरीका आनेवालों को नए वीज़ा नहीं जारी किए जाएंगे. लेकिन जिनके पास पहले से वीज़ा या ग्रीन कार्ड हैं उनपर कोई रोक नहीं लगेगी.
ये आदेश सूडान, सीरिया, ईरान, लीबिया, सोमालिया और यमन से आनेवालों पर लागू होगा. जनवरी में जारी किए गए आदेश में इस सूची में इराक़ को भी रखा गया था. लेकिन अब वो इस सूची में नहीं है.
साथ ही हवाईअड्डों पर पिछली बार की तरह अफ़रातफ़री नहीं फैले उसके लिए सभी एजेंसियों को दस दिन का वक्त दिया गया है और ये नया आदेश 16 मार्च से लागू होगा. पिछली बार जिन लोगों के पास वीज़ा और ग्रीनकार्ड थे उन्हें भी रोका जा रहा था जिसके बाद पूरी दुनिया में काफ़ी हंगामा मचा था.
इस आदेश के तहत ये प्रतिबंध 90 दिनों तक लागू रहेगा और इस दौरान सूची में शामिल हर देश की तरफ़ से मुहैया करवाई गई जानकारी की जांच होगी कि वो कितनी पुख़्ता हैं. उसके बाद उन देशों को और 50 दिन दिए जाएंगे कि वो जानकारी जुटाने की अपनी प्रक्रिया में बेहतरी लाएं.
राष्ट्रपति ट्रंप ने ये आदेश सबसे पहले जनवरी में जारी किया था, लेकिन अदालत ने उस पर रोक लगा दी थी और अब उन्हीं क़ानूनी पेचीदगियों को दूर करने की कोशिशों के तहत दोबारा से ये आदेश जारी हुआ है.
अमरीका के होमलैंड सेक्योरिटी या गृह मंत्री का कहना था, "ये आदेश अमरीका को सुरक्षित बनाएगा और हमारे आप्रवासन तंत्र को लेकर जो चिंताएं हैं उन्हें दूर करने में कारगर होगा."
इस आदेश के तहत अगले 120 दिनों तक अमरीका के शरणार्थी कार्यक्रम पर भी पूरी तरह से रोक लग जाएगी लेकिन जिन शरणार्थियों को पहले से ही अमरीका आने की मंज़ूरी मिल चुकी है उन्हें नहीं रोका जाएगा. साथ ही पुराने आदेश में सीरिया से आनेवाले शरणार्थियों पर जो अनिश्चतकालीन प्रतिबंध लगा था वो अब हट गया है. उनपर भी वही नियम लागू होंगे जो दूसरे शरणार्थियों पर लागू होंगे.
इसके अलावा इस आदेश में से उस हिस्से को भी हटा दिया गया है जिसमें कहा गया था कि शरणार्थी कार्यक्रमों में मुसलमान बहुल देशों में रहनेवाले इसाईयों को प्राथमिकता दी जाएगी.
ट्रंप प्रशासन के अनुसार इस आदेश में पहले के मुकाबले कई बदलाव हैं लेकिन इसका मकसद भी आतंकवाद प्रभावित इलाकों से जुड़े लोगों को अमरीका से तबतक बाहर रखना है जबतक सरकार वीज़ा प्रणाली और शरणार्थियों की जांच प्रक्रिया पर आश्वस्त नहीं हो जाती.
माना जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन को उम्मीद है कि इन बदलावों की वजह से इस आदेश को अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकेगी. एटॉर्नी जनरल जेफ़ सेशंस ने भी अपने बयान में कहा है कि राष्ट्रपति को ये आदेश जारी करने का अधिकार संविधान की तरफ़ से मिला है और उसकी तहत ट्रंप ने ये आदेश जारी किया है.
विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने कहा है कि आदेश जारी करने से पहले अमरीका ने अपने सहयोगी देशों से बात की है और उन्हें अमरीका की सुरक्षा चिंताओं से वाकिफ़ करवाया है.
कुछ लोगों का कहना है कि पिछले आदेश के मुक़ाबले इस नए आदेश में एक नर्म रवैया पेश करने की कोशिश की गई है.
लेकिन न्यूयॉर्क के ऐटॉर्नी जनरल ने एक बयान जारी करके कहा है कि इस आदेश में बदलाव ज़रूर हैं लेकिन इसमें भी मुसलमानों के ख़िलाफ़ स्पष्ट रूप से भेदभाव नज़र आ रहा है.
उनका कहना था, "इस देश की अदालतें ये स्पष्ट कर चुकी हैं कि ट्रंप संविधान से उपर नहीं हैं."
ग़ौरतलब है कि न्यूयॉर्क के ऐटॉर्नी जनरल के नेतृत्व में कई राज्यों ने ट्रंप के पिछले आदेश को चुनौती दी थी और अदालतों ने उस पर रोक लगाई थी.