भारत और चीन की दोस्ती ही है कि मैं घर आ सका: वांग छी
भारत में 54 सालों से फंसे पूर्व चीनी सैनिक वांग छी शनिवार को वापस अपने देश चीन की ज़मीन पर पहुंचे.
चीन के शीनयांग पहुंचकर बीबीसी की ज़ो चेन ने वांग छी के परिवार से बात की. ज़ो चेन बताती हैं कि वहां बीबीसी को छोड़कर अधिकतर मीडिया को वांग छी से मिलने नहीं दिया जा रहा.
ज़ो चेन ने वांग छी से पूछा कि क्या जो चीनी नाश्ता वो मिस कर रहे थे, क्या उन्होंने वो खाया, वांग छी ने कहा, "हां. ये भारत और चीन के बीच दोस्ती ही है कि मैं चीन आ सका. चीन आने के लिए चीन और भारत की सरकारों का धन्यवाद. मैं हर उस व्यक्ति का धन्यवाद करना चाहते हूँ जिन्होंने हमारी मदद की."
ज़ो चेन का कहना है कि चीन के अधिकांश स्थानीय मीडिया को वांग छी और उनके रिश्तेदारों से दूर रखा जा रहा है.
वांग के बेटे विष्णु भी उनके साथ चीन गए हैं.
'खुशी के आंसू'
विष्णु ने बीबीसी से कहा, "बहुत अच्छा महसूस कर रहे हैं. पिताजी यहां अच्छे से पहुंच गए हैं. सभी मिलकर यहां खुशी मना रहे हैं. रोना तो इसलिए आ रहा है कि इतने साल बाद पिताजी अपने परिवार से मिल रहे हैं. ये तो असल में खुशी के आंसू हैं."
विष्णु कहते हैं, "इसमें बीबीसी का बहुत योगदान रहा है जिन्होंने हमारे तिरोड़ी में आकर पिताजी और पूरे परिवार का इंटरव्यू किया. उन सभी चैनलों का भी बहुत-बहुत धन्यवाद जो हमारे यहां आए थे और यहां तक का सफर तय करवाया."
ज़ो चेन बताती हैं कि चीन में मौजूद वांग छी का परिवार उनके लौटने पर बेहद खुश है.
उनके अनुसार वांग छी के भतीजे यिंगजुन वांग ने बताया कि अभी उन्हें नहीं पता कि वांग छी कब भारत लौटेंगे, इतने सालों में परिवार के कई लोगों की मौत हो गई है और वो इस बारे में बता कर अभी वांग छी को दुखी नहीं करना चाहते.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)















