किसकी टेलीफ़ोन लाइन काटी डोनल्ड ट्रंप ने

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ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री मैल्कम टर्नबुल के साथ टेलीफ़ोन पर हुई बातचीत को अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने विदेशी नेताओं के साथ हुई अबतक की बातचीत में सबसे ख़राब बताया है.
यह बातचीत शरणार्थियों को अमरीका में फिर से बसाने को लेकर हुई थी. लेकिन ट्रंप ने फ़ोन बीच में ही काट दिया था.
ऑस्ट्रेलिया में शरण मांग रहे 1250 लोगों को अमरीका में बसाए जाने को लेकर समझौते की पहल ओबामा प्रशासन में हुई थी.
इन शरणार्थियों को ऑस्ट्रेलिया ने नारू और पापुआ न्यू गिनी में जेलों में रखने की जगह स्वीकार करने से इन्कार कर दिया था.
बाद में किए एक ट्वीट में ट्रंप ने लिखा, '' वो इस बेवकूफ़ी भरे समझौते का अध्ययन कर रहे हैं.''

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टर्नबुल ने कहा कि ट्रंप ने उन्हें आश्वासन दिया है कि बातचीत जारी रहेगी.सिडनी रेडियो स्टेशन से टर्नबुल ने ट्रंप की ओर से फ़ोन रख देने की ख़बरों को ग़लत बताया.
पिछले शुक्रवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर दस्तख़त किए थे, जो सात मुस्लिम बहुल देशों के शरणार्थियों और लोगों के अमरीका आने पर अस्थायी प्रतिबंध लगाता है.
इसके बाद से ही ऑस्ट्रेलिया समझौते को आगे बढ़ाने की पुष्टि चाहता है.
प्रवासियों पर प्रतिबंध लगाए जाने के एक दिन बाद सोमवार को टर्नबुल ने कहा था कि उन्होंने ट्रंप से बातचीत कर समझौते को जारी रखने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया था.
बुधवार को अमरीका राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने भी पुष्टि की कि ट्रंप समझौते को जारी रखना चाहते हैं.

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लेकिन ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कारपोरेशन के ख़बर देने के कुछ देर बाद ही व्हाइट हाउस के सूत्रों ने बताया कि समझौता अभी भी विचाराधीन है.
अख़बार 'वॉशिंगटन पोस्ट' के मुताबिक़ टर्नबुल को किए टेलीफ़ोन को ट्रंप ने अबतक की सबसे ख़राब टेलीफ़ोन काल बताया.
अख़बार के मुताबिक़ राष्ट्रपति ने कहा टर्नबुल बोस्टन में अगला धमाका करने वालों को अमरीका भेजने के लिए उत्सुक दिख रहे थे. राष्ट्रपति ने 25 मिनट बाद अचानक ही टेलीफ़ोन कॉल काट दी.
अखबार के मुताबिक़, '' उन्होंने कहा, मैं इन लोगों को नहीं चाहता हूं.''
ट्रंप ने बाद में ट्विटर पर लिखा, '' ओबामा प्रशासन ऑस्ट्रेलिया से हज़ारों अवैध प्रवासियों को लेने के लिए सहमत था. क्यों? ''

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मानवाधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन ऑस्ट्रेलिया की शरणार्थियों पर नीति को लेकर आलोचना करते रहे हैं.
पिछले साल नवंबर में जब इस समझौते पर बातचीत शुरू हुई तो इस बात पर सहमति बनी थी कि अमरीकी अधिकारी शरणार्थियों का आकलन कर तय करेंगे कि किसे अमरीका में बसाया जाएगा.
समझौते को संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी एजेंसी के ज़रिए लागू किया जाना है.












