ट्रंप का ओबामा विदेश नीति को पहला 'झटका'

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अमरीका के नए राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने एक व्यापार समझौता 'ट्रांस पैसिफिक पार्टनरशिप' (टीपीपी) से बाहर निकलने के लिए एक कार्यकारी आदेश पर दस्तख़त कर दिया है. ऐसा कर उन्होंने अपने चुनावी अभियान में किए गए एक वादे को पूरा किया दिया है.
इस व्यापार समझौते को पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की एशिया नीति की धुरी माना जाता था जिस पर 12 देशों ने हस्ताक्षर किए थे.
राष्ट्रपति पद के लिए अपने चुनाव अभियान के दौरान ट्रंप ने टीपीपी को एक "संभावित आपदा" करार देते हुए कहा था कि इससे अमरीका में उत्पादन क्षेत्र को नुक़सान हुआ है.
डोनल्ड ट्रंप ने "बड़े पैमाने पर" टैक्स घटाने और विनियमनों को कम करने का वादा किया है. लेकिन जिन कंपनियों के कारखाने विदेशों में हैं उन पर "बहुत बड़ा सीमा कर" लगाने का एलान किया है.
व्हाइट हाउस में व्यापार जगत की हस्तियों को ट्रंप ने आयात पर जुर्माना लगाने की चेतावनी दी और कहा कि "आपको सिर्फ़ इतना करना है कि यहीं रहना है."
राष्ट्रपति ने ये टिप्पणी डाव कैमिकल्स, लॉकहीड मार्टिन, अंडर आर्मर, व्हर्लपूल, टेसला और जॉनसन एंड जॉनसन समेत 12 कंपनियों के अधिकारियों के सामने की है.
शपथ लेने के बाद ट्रंप के ख़िलाफ़ बहुत से प्रदर्शन हुए हैं और मीडिया के साथ भी उनकी नोंकझोंक हुई है.

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व्हाइट हाउस में सोमवार को एक बैठक के बाद ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा, "हम विनियमन को बड़े पैमाने पर कम करेंगे", लेकिन ये नियम "लोगों के बचाव के लिए होंगे."
उन्होंने वादा कि या है कि वे कॉरपोरेट टैक्स को मौजूदा 35 फ़ीसदी से कम कर 15 या 20 फ़ीसदी तक कर सकते हैं और विनिमयनों में 75 फ़ीसदी तक कटौती कर सकते हैं.
लेकिन ट्रंप ने कहा है कि वे विदेशों में तैयार किए गए सामानों पर टैक्स लगाएंगे.
राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद से उन्होंने उन अमरीकी कंपनियों को फटकार लगाई है जिन्होंने अपने कारख़ाने अमरीका से विदेश भेज दिए.
ट्रंप ने अमरीकी मज़दूरों को बेरोज़गार करने के लिए मेक्सिको और कनाडा के साथ हुए व्यापार समझौतों को दोषी ठहराया है.
राष्ट्रपति पद के चुनाव प्रचार के दौरान अमरीका में नई नौकरियां पैदा करना ट्रंप ने चुनावी वादों में शुमार है.
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