You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
रेक्स टिलरसन होंगे नए अमरीकी विदेश मंत्री- ट्रंप
अमरीका के अगले विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन को दूसरे देशों के साथ बातचीत का व्यापक अनुभव है, लेकिन एक नेता के तौर पर नहीं, बल्कि एक बिजनेसमैन के तौर पर.
अमरीका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने उन्हें देश का अगला विदेश मंत्री बनाने की घोषणा की है.
टिलरसन दुनिया की बड़ी कंपनियों में से एक एक्सॉन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं.
तेल कंपनी एक्सॉन का कारोबार दुनिया के दर्ज़नों देशों में फैला हुआ है और इनमें ऐसे देश भी हैं जिनके साथ अमरीका के संबंध मधुर नहीं रहे हैं. मसलन रूस, जो कि तेल शोधन की टेक्नोलॉजी के लिए पश्चिमी देशों पर निर्भर रहता है.
टिलरसन को विदेश मंत्री बनाने की घोषणा के साथ ही कुछ हलकों में चिंताएं बढ़ गई हैं, क्योंकि पिछले ही दिनों इंटेलिजेंस रिपोर्टों में कहा गया था कि अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान रूस ने हस्तक्षेप किया था.
ये भी कहा गया था कि इस हस्तक्षेप के कारण ट्रंप को राष्ट्रपति चुनाव में मदद मिली. हालांकि ट्रंप ने इसे ख़ारिज कर दिया था.
समाचार एजेंसी एपी के अनुसार टिलरसन ने पूर्व में उन प्रतिबंधों का विरोध किया था जो अमरीका और अन्य पश्चिमी देशों ने रूस पर लगाए थे.
ये बात 2014 की है जब रूस ने क्रीमिया को यूक्रेन से अलग कर दिया था. टिलरसन मुक्त व्यापार के पैरोकार रहे हैं और मध्य पूर्व में अमरीकी उपस्थिति को बढ़ाने के पक्षधर भी हैं.
हालांकि उनके ये विचार ट्रंप के विचारों से मेल नहीं खाते हैं. ग़ौरतलब है कि 2013 में क्रेमलिन ने टिलरसन को सम्मानित करते हुए ऑर्डर ऑफ़ फ़्रेंडशिप दिया था.
इंजीनियर हैं टिलरसन
समाचार एजेंसियों एपी और एएफ़पी के अनुसार, टेक्सास के विचिता फॉल्स के रहने वाले 64 साल के टिलरसन ने एक्सॉन कंपनी में ही अपना करियर शुरु किया था.
उन्होंने 1975 में यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास से इंजीनियरिंग की डिग्री लेने के बाद एक्सॉन ज्वाइन किया था. धीरे धीरे वो अफ़सर बने और एक्सॉन के अमरीका, रूस और यमन के आपरेशनों में काम कर के अनुभव प्राप्त किया.
नब्बे के दशक तक टिलरसन एक्सॉन के सारे विदेशी अभियान देखते थे. उन्होंने रूस के पूर्वी तट पर सखालिन तेल एवं गैस परियोजना में एक्सॉन की तरफ से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.
समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक, इसके बाद एक्सॉन और रूस की सरकारी कंपनी रोसनेफ्ट के बीच रूस के आर्कटिक प्रांत में तेल की खोज का 3.2 अरब डॉलर का सौदा हुआ था.
पुतिन से पुराने संबंध
अमरीका के सेंटर फ़ॉर स्ट्रैटिजिक और इंटरनेशनल स्टडीज़ के जॉन हाम्रे ने एएफ़पी को बताया, "यदि हेनरी किसिंजर को छोड़ दें तो टिलरसन का व्लादीमिर पुतिन के साथ जितना संपर्क रहा है, शायद किसी और अमरीकी का उतना संपर्क नहीं रहा है."
समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक, टिलरसन कहते हैं कि रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के साथ उनका रिश्ता 15 साल पुराना है और दोनों के संबंध गहरे हैं.
तेल कंपनियों को विदेशों में बहुत ही नपी तुली कूटनीतिक नीतियां अपनानी होती हैं और संभवत यही कारण है कि ट्रंप ने अपने विदेश मंत्री के तौर पर टिलरसन को चुना है.