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बेहाल हैं बांग्लादेश में भारतीय छात्र
भारत में पांच सौ और हज़ार के नोट बंद करने का असर पड़ोसी देश बांग्लादेश में रह रहे भारतीयों पर भी पड़ रहा है.
भारत से पढ़ाई करने के लिए बांग्लादेश गए छात्रों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.
वहां भी भारतीय नोटों को कोई नहीं ले रहा है जिसकी वजह से यहां से गए छात्र अपने आप को बेबस महसूस कर रहे हैं.
भारत से बांग्लादेश की राजधानी ढाका में एमबीबीसी की पढ़ाई करने गए मोहम्मद जीशान पाशा बताते हैं, "यहां पैसा एक्सचेंज करने वाले पांच सौ और हज़ार का नोट नहीं ले रहे हैं. हम भारतीय रुपये एक्सचेंज करके यहां टका लेते थे. अब हमें टका नहीं मिल रहा है. जिससे रोजमर्रा के खर्च में बहुत दिक्कत हो रही है."
वो आगे बताते हैं, "जब मैंने भारतीय दूतावास इसके लिए फोन किया तो उन लोगों ने कहा कि हमलोग इसमें कुछ नहीं कर सकते हैं. आपको वापस जाकर ये पैसे वहां से बदलवा कर लाने होंगे. यहां पर मौजूद स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया में जब गया तो बैंक वालों ने भी मना कर दिया और कहा कि यहां पर कोई सुविधा नहीं है."
जीशान बताते हैं कि उनके कॉलेज में दस भारतीय छात्र हैं वहीं किसी-किसी कॉलेज में तो दौ सौ से भी ज्यादा भारतीय छात्र हैं.
कश्मीर से एमबीबीएस की पढ़ाई करने ढाका गए आसिफ का भी कहना है कि बांग्लादेश में भारतीय रुपये के नहीं चलने से बहुत परेशानी हो रही है. खाना तक नहीं खा पा रहे हैं. जेब में पैसे तक नहीं है. किराए के लिए पैसे नहीं है. कॉलेज नहीं जा पा रहे हैं.
वो बताते हैं, "एटीएम से भी पैसे नहीं निकल पा रहे हैं. सिर्फ़ दो हज़ार रुपये निकल रहे हैं जो दो-चार दिन में ही ख़त्म हो जाते हैं. उधर घरवाले भी बैंकों में पैसे नहीं डाल पा रहे हैं."
वहीं ढाका के ही एक और छात्र ज़ाकिर कहते हैं कि हमेशा दो-दो हज़ार रुपये निकालने से चार्ज भी तो बहुत कट रहे हैं. यहां भारत का एकमात्र बैंक एसबीआई ही है. अब हम सोच रहे हैं कि जो पैसे हमारे पास हैं उसे किसी तरह भारत भिजवाकर एक्सचेंज करवा लूं.
(बांग्लादेश में मौजूद छात्रों से रोहित जोशी की बातचीत पर आधारित)
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