हिलरी या ट्रंप- क्या कहते हैं भारतीय छात्र

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- Author, सलीम रिज़वी
- पदनाम, न्यूयॉर्क से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव की गहमागहमी अब चरम पर पहुंच गई है और इन चुनावों में भारतीय मूल के लोगों की खूब दिलचस्पी है.
भारतीय मूल के छात्र बड़ी संख्या में न्यूयॉर्क, शिकागो, कैलीफ़ोर्निया समेत कई बड़े शहरों के अलग-अलग विश्वविद्यालयों में पढ़ते हैं.
ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक़ अमरीका में करीब दो लाख भारतीय छात्र मैनेजमेंट, इंजीनियरिंग, मेडिसिन और सामाजिक विज्ञान की पढ़ाई कर रहे हैं.
अमरीका में इस चुनावी मौसम में भारतीय छात्रों की कुछ अहम मुद्दों पर ख़ास नज़र है. इनमें आप्रवासन क़ानून, वित्तीय मामले और उनसे जुड़े क़ानून और सामाजिक मुद्दे शामिल हैं.
अमरीकी चुनाव में डेमोक्रैट हिलेरी क्लिंटन और रिपब्लिकन डोनल्ड ट्रंप समर्थक भारतीय छात्रों की राय:-
तन्मय महेंद्रू (हिलेरी समर्थक)
"मैं मूल रूप से हरियाणा के फ़रीदाबाद शहर का रहने वाला हूं. मैंने सोलन में जेपी यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद एक कंप्यूटर कंपनी में तीन साल काम किया. इसके बाद अमरीका में उच्च शिक्षा के लिए आ गया. अभी न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी से बिज़नेस मैनेजमेंट और आईटी में मास्टर्स कर रहा हूं.
न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के लिए मैंने हज़ारों डॉलर का क़र्ज़ लिया. अमरीका में मेरी पढ़ाई का एक साल का ख़र्च करीब 35 हज़ार डॉलर है. मास्टर्स कोर्स दो साल का है, यानी डिग्री हासिल करने में लगभग 70 हज़ार डॉलर का ख़र्चा आएगा. मुझे उम्मीद है कि डिग्री हासिल करने के बाद अच्छी नौकरी मिल जाएगी और मैं पढ़ाई के लिए लिया क़र्ज़ चुका सकूंगा.
मेरा तो इरादा है कि अगर अच्छी नौकरी मिल जाए तो अमरीका में ही रह जाऊं. मुझे उम्मीद है कि बिज़नेस एनालिटिक्स या डेटा एनालिटिक्स में नौकरी मिल जाएगी.
लेकिन मुझे लगता है कि अगर चुनाव में डोनल्ड ट्रंप जीत गए तो यह कई लोगों के नज़रिए से ग़लत होगा. डोनल्ड ट्रंप अपनी नीतियों के बारे में साफ़ तौर पर नहीं बताते, वह एक दिन कुछ कहते हैं, दूसरे दिन उससे पलट जाते हैं.
ट्रंप की आप्रवासियों को लेकर नीति मुझे बिल्कुल पसंद नहीं है. वह अवैध तौर पर रह रहे विदेशियों को अमरीका से बाहर भगाने की बात करते हैं. इस तरह की नीतियों से हमारे जैसे विदेशी छात्रों के लिए भी परेशानी बढ़ती है.

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डोनल्ड ट्रंप अमरीका को महान बनाना चाहते हैं, लेकिन उसके बारे में साफ़ तौर पर कोई नीति नहीं बताते.
ट्रंप बस यही कहते हैं कि वह ऐसे लोगों को साथ रखेंगे, जो अच्छे काम करेंगे. लेकिन वह तो अपने कारोबार के बारे में भी नहीं बताते. अपने टैक्स के दस्तावेज़ भी नहीं दिखाते. हिलरी क्लिंटन की खामियां ही गिनाते रहते हैं. इससे हमारे जैसे लोगों के लिए भी अनिश्चितताएं बढ़ जाती हैं.
ट्रंप तो दूसरे देशों के साथ दीवार खींचना चाहते हैं और व्यापार संधियों को खत्म करने की बात करते हैं. वो अपनी नीतियों से अमरीका को किसी और युग में ले जाएंगे. वहीं हिलरी क्लिंटन को अनुभव है और वह दूसरे देशों के साथ मिलकर काम करने की बात भी करती हैं. इसलिए मेरे ख़्याल से तो बेहतर यही है कि हिलरी जीतें. "
विविध तलवार (ट्रंप समर्थक)
"मेरा नाम विविध तलवार है, मैं पंजाब के अमृतसर का रहने वाला हूं और न्यूयॉर्क की होफ़्स्ट्रा यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन कर रहा हूं. मैंने 12वीं कक्षा तक अमृतसर में पढ़ाई की और कभी सोचा नहीं था कि न्यूयॉर्क आकर पढ़ाई करूंगा.
अमरीकी राष्ट्रपति पद के चुनाव में मेरी काफ़ी दिल्चस्पी है. चुनाव में डोनल्ड ट्रंप और हिलरी क्लिंटन के बीच कांटे की टक्कर है.
मैं समझता हूं कि डॉनल्ड ट्रंप की नीतियां, ख़ासकर आर्थिक नीतियां बेहतर हैं, क्योंकि उन्हें बिज़नेस का अच्छा अनुभव है. हम डोनल्ड ट्रंप की निजी ज़िंदगी के बारे में टिप्पणी नहीं कर सकते, क्योंकि यह सालों पहले का मामला है.
मुझे लगता है कि इस समय अमरीका की आर्थिक हालत ठीक नहीं है और डोनल्ड ट्रंप ही बेहतर साबित होंगे. उनकी आर्थिक नीतियां बेहतर हैं. इसके अलावा विदेश मामलों में भी ट्रंप की नीतियां हिलरी से बेहतर हैं.
होफ़्स्ट्रा यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएशन की पढ़ाई तीन साल की है, यानी डिग्री हासिल करने में लगभग 1 लाख, 20 हज़ार डॉलर का ख़र्चा आएगा. इसमें आधा तो मेरे परिवार ने दिया है और आधा मुझे स्कॉलरशिप से मिला. इसके अलावा फ़्लैट का सालाना किराया 10 हज़ार डॉलर है. खाना-पीना अलग.

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मैंने अभी पढ़ाई के साथ-साथ दोस्तों के साथ एक कंपनी शुरू की है और उम्मीद है कि डिग्री हासिल करने के बाद इसे और बढ़ाने में मदद मिलेगी. इस सिलसिले में चुनाव कोई जीते या अमरीकी प्रशासन की नीति कोई भी हो, लेकिन अगर हमारी सलाहियत है, तो हम अपने काम में अच्छा करेंगे.
मुझे डोनल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने से कोई डर नहीं है, क्योंकि उनके राष्ट्रपति बनने के बाद भी अगर वह कोई कदम उठाना चाहेंगे, तो इसके लिए अमरीकी संसद की मंज़ूरी लेनी होगी.
और जहां तक कथित नस्ली भेदभाव वाले बयानों की बात है तो मुझे लगता वह तो उन्होंने अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए दिए थे और कामयाब भी रहे. उन्होंने प्राइमरी चुनावों में बड़े-बड़े दिग्गजों को हराया और अब हिलरी क्लिंटन जैसी अनुभवी नेता को कांटे की टक्कर दे रहे हैं."
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