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समीक्षा और सरकार गठन का दौर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दिल्ली में जनादेश के बाद की प्रक्रिया तेज़ हो गई है. कहीं समीक्षा चल रही है तो कहीं सरकार गठन की तैयारी. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को 14वीं लोकसभा की कैबिनेट की आखिरी बैठक आहूत की. बैठक में 14वीं संसद को भंग करने का प्रस्ताव पारित हुआ और इस तरह 15 वीं लोकसभा के लिए बाकी की औपचारिक तैयारियों का सिलसिला शुरू हो गया है. इस सरकार गठन की प्रक्रिया से समानान्तर दिल्ली में और राजनीतिक दल भी समीक्षा और विश्लेषण का दौर शुरू कर चुके हैं. इनमें वामदल और भाजपा हैं. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो की बैठक दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में चल रही है. ख़बर है कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेब भट्टाचार्य बैठक में शामिल नहीं हुए हैं. सीपीएम केरल और पश्चिम बंगाल में पार्टी को मिली करारी हार के कारणों की पड़ताल और चुनाव परिणामों की समीक्षा कर रही है. वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के घर पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और राज्यों में पार्टी के मुख्यमंत्रियों की भी एक अहम बैठक हो रही है. एनडीए पर संशय
भाजपा की अहम समीक्षा बैठक के बाद सोमवार की एनडीए की भी एक बैठक होनी थी जिसमें भाजपा के साथ खड़े राजनीतिक दल चुनाव परिणामों पर चर्चा करते. पर अब जानकारी मिल रही है कि एनडीए की सोमवार शाम होने वाली बैठक स्थगित कर दी गई है. हालांकि इसके पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है पर माना जा रहा है कि एनडीए में पड़ रही फूट के बाद कुछ नेता इस बैठक में शामिल नहीं हो रहे हैं. शरद यादव पहले ही एनडीए की पराजय की ठीकरा नरेंद्र मोदी और वरुण गांधी के सिर पर फोड़ चुके हैं. अब बताया जा रहा है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी एनडीए की इस बैठक में शामिल होने की असमर्थता व्यक्त कर चुके हैं. जानकार मानते हैं कि यह एनडीए के बने रहने पर एक सवाल खड़ा होता दिखा रहा है. सरकार की तैयारी उधर चेन्नई में डीएमके के पार्टी नेताओं, सांसदों की भी एक उच्चस्तरीय बैठक हो रही है जिसमें सरकार में अपनी भूमिका को लेकर विचार विमर्श का क्रम जारी है.
डीएमके ने तमिलनाडु में अच्छा प्रदर्शन किया है और यह चुनाव कांग्रेस के साथ गठबंधन धर्म निभाते हुए लड़ा है. ऐसे में सरकार में उनकी ठीकठाक भूमिका तय है. पर चर्चा इन मुद्दों पर है कि कैबिनेट से लेकर मंत्रालयों के वितरण तक उन्हें क्या मांगना चाहिए और क्या मिल सकता है. उधर दिल्ली में हुई 14वीं लोकसभा की अंतिम बैठक में लालू प्रसाद भी शामिल होने पहुँचे. कांग्रेस के नेताओं के साथ यूपीए से अलग होकर चुनाव लड़ने के बाद से यह उनकी पहली मुलाक़ात थी. बैठक में शामिल लालू प्रसाद ने बाहर निकलकर पत्रकारों से कहा कि वो सरकार को समर्थन दे रहे हैं और वो भी बिना किसी शर्त के. कैबिनेट में शामिल किए जाने के मुद्दे पर लालू प्रसाद सवाल टाल गए. पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के प्रभारी दिग्विजय सिंह ने पत्रकारों से कहा कि लालू प्रसाद कठिन समय में सोनिया गांधी के साथ खड़े रहे हैं, उनको हम नहीं भूल सकते हैं. विश्लेषक इसे लालू के लिए राहत भरा संकेत मान रहे हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें राष्ट्रपति ने 14वीं लोकसभा भंग की18 मई, 2009 | चुनाव 2009 'कराट को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए'17 मई, 2009 | चुनाव 2009 कांग्रेस में नई सरकार के स्वरुप पर चर्चा 17 मई, 2009 | चुनाव 2009 आज़म का इस्तीफ़ा, अमर ने कसी कमर17 मई, 2009 | भारत और पड़ोस क्या प्रतिक्रिया होगी पड़ोसी देशों की?16 मई, 2009 | चुनाव 2009 विधान सभा चुनाव का हाल16 मई, 2009 | चुनाव 2009 यूपीए की 'जय', पद छोड़ना चाहते हैं आडवाणी16 मई, 2009 | चुनाव 2009 जनादेश 2009: पल-पल बदलता घटनाक्रम16 मई, 2009 | चुनाव 2009 | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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