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यूपीए की 'जय', पद छोड़ना चाहते हैं आडवाणी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पंद्रहवीं लोकसभा चुनाव के नतीजों और रुझानों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) को भारी बढ़त मिली हुई है. भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है और भाजपा ने हार स्वीकार भी कर ली है. सोनिया गांधी के आवास 10 जनपथ पर मौजूद बीबीसी संवाददाता अविनाश दत्त के मुताबिक़ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने यूपीए की जीत पर देश की जनता को धन्यवाद दिया है और कहा है कि ये सरकार के अच्छे काम का इनाम है. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास पर आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने कहा, "भारत के लोगों ने बड़ी बुलंदी से अपनी बात कही है. सांप्रदायिक घृणा से मुक्त प्रशासन या सरकार के लिए उन्होंने मत दिया है." मनमोहन सिंह ने कहा कि वे कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी को मंत्रिमंडल का सदस्य बनने के लिए कहेंगे. दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने हार स्वीकार की है और कांग्रेस पार्टी को बधाई दी है. पार्टी प्रवक्ता अरुण जेटली ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि लालकृष्ण आडवाणी ने विपक्ष के नेता का पद छोड़ने की मंशा ज़ाहिर की है. लेकिन पार्टी ने इसे मंज़ूरी नहीं दी है. ताज़ा जानकारी के मुताबिक़ यूपीए 147 सीटों पर जीत हासिल कर चुकी है और 112 सीटों पर गठबंधन के उम्मीदवार आगे चल रहे हैं. एनडीए को अभी तक 90 सीटें मिली हैं और 72 सीटों पर उसके उम्मीदवार आगे हैं. जश्न यूपीए की बढ़त की ख़बर आते ही नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में जश्न का माहौल हो गया. जम कर नारेबाज़ी हुई, मिठाइयाँ बाँटी गई और पटाखे छोड़े गए. कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने इसे शानदार जीत बताया है. ख़ुशी से गदगद नज़र आ रहे केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के नेता ऑस्कर फ़र्नांडीस ने कहा- मनमोहन सिंह देश के अगले प्रधानमंत्री होंगे. कांग्रेस मुख्यालय से अलग भाजपा मुख्यालय पर निराशा का आलम है. पार्टी प्रवक्ता वेंकैया नायडू ने माना कि पार्टी नतीजों से निराशा हुई है. उन्होंने कहा, "हम नतीजों की समीक्षा करेंगे. लेकिन मैं इससे सहमत हूँ कि हमें निराशा हुई है." कौन जीता कौन हारा जिन उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है, उनमें प्रमुख हैं पटना साहिब से भाजपा उम्मीदवार शत्रुघ्न सिन्हा, विदिशा से भाजपा नेता सुषमा स्वराज, छिंदवाड़ा से कांग्रेस नेता कमलनाथ, अमृतसर से भाजपा नेता नवजोत सिंह सिद्धू, श्रीनगर से नेशनल कॉन्फ़्रेंस के फ़ारूख़ अब्दुल्लाह, अजमेर से कांग्रेस के सचिन पायलट, मुंबई नॉर्थ सेंट्रल से कांग्रेस की प्रिया दत्त. रामपुर सीट से समाजवादी पार्टी की जयाप्रदा चुनाव जीत गई हैं. प्रजाराज्यम पार्टी के प्रमुख अभिनेता चिरंजीवी तिरुपति से चुनाव जीते हैं. झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा सिंहभूमि से जीत गए हैं. वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में खड़े थे. पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा भी हासन से चुनाव जीत गए हैं.
पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद अज़हरुद्दीन मुरादाबाद से जीत गए हैं. कोलकाता दक्षिण से तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बैनर्जी भी जीत गई हैं. भाजपा के वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह दार्जीलिंग से चुनाव जीत गए हैं. भागलपुर से भाजपा के सैयद शाहनवाज़ हुसैन जीत गए हैं. हिमाचल प्रदेश की मंडी संसदीय सीट से पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता वीरभद्र सिंह चुनाव जीत गए हैं. तिरुअनंतपुरम से कांग्रेस के शशि थरूर ने जीत हासिल की है. ग्वालियर से भाजपा की यशोधरा राजे सिंधिया जीत गई हैं. उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह एटा से चुनाव जीत गए हैं. वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे थे. समाजवादी पार्टी उनका समर्थन कर रही थी. राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष अजित सिंह बागपत से जीत गए हैं. लखनऊ से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार लालजी टंडन विजयी हुए हैं. तो भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ग़ाज़ियाबाद से चुनाव जीत गए हैं. कई दिग्गजों को इस चुनाव में भारी झटका लगा है. वर्षों से हाजीपुर की सीट से चुनाव जीत रहे लोकजनशक्ति पार्टी के प्रमुख रामविलास पासवान हार गए हैं. यहाँ से जनता दल (यूनाइटेड) के रामसुंदर दास विजयी हुए हैं. एक और केंद्रीय मंत्री रेणुका चौधरी खम्मम से हार गई हैं. बाड़मेर से भाजपा के मानवेंद्र सिंह चुनाव हार गए हैं. वामपंथी विपक्ष में बैठेंगे सीपीएम महासचिव प्रकाश करात ने कहा कि चुनाव परिणाम पार्टी के लिए बड़ा धक्का हैं. उनका कहना था कि पार्टी के ख़राब प्रदर्शन की गंभीर समीक्षा किए जाने की ज़रूरत है. उन्होंने स्पष्ट किया कि वामपंथी विपक्ष में बैठेंगे. उन्होंने बताया कि सीपीएम ने 18 मई को समीक्षा के लिए बैठक आयोजित की है. दूसरी ओर सीपीआई नेता एबी बर्धन का कहना है, '' वाममोर्चा विपक्ष में बैठेगा. बिना वजह हम क्यों कांग्रेस के साथ चिपके रहेंगे.'' बर्धन का कहना था कि पार्टी जनता के प्रश्नों को उठाएगी और नतीजों की समीक्षा के लिए उसने 19,20 और 21 मई को बैठक बुलाई है. तीसरे मोर्चे के नेताओं ने भी चुनाव परिणामों के बाद बैठक बुलाई है. |
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