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बुधवार, 29 अप्रैल, 2009 को 15:08 GMT तक के समाचार
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'आतंकवाद पर प्रमाण पत्र की ज़रूरत नहीं'

सोनिया गाँधी
पिछली बार दिल्ली की सात में छह सीटों पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने भारतीय जनता पार्टी को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि आतकंवाद के विरुद्ध युद्ध के मुद्दे पर उनकी पार्टी को किसी के प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है.

बुधवार को दिल्ली में चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए सोनिया गाँधी ने कहा, "जिस पार्टी के इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी जैसे नेताओं ने अपने देश की एकता के लिए अपने प्राणों तक का बलिदान दिया, उस पार्टी को आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में किसी के प्रमाण पत्र की ज़रूरत नहीं है."

ग़ौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस पार्टी पर आतकंवाद के मुद्दे पर नरम रवैया आपनाने का आरोप लगाती रही है. सोनिया गाँधी ने अपने संबोधन के दौरान सांप्रदायिकता के मुद्दे पर भाजपा को ख़ूब खरी-खोटी सुनाई.

सांप्रदायिकता के मुद्दे पर बोलते हुए सोनिया गाँधी ने कहा, "आप जानते है कि कुछ राजनीतिक पार्टियाँ और तत्व ऐसे हैं, जो हमेशा इस ताक़ में रहती हैं कि कब मौक़ा मिले कि समाज को सांप्रदायिक आधार पर बाँटा जा सके और अपने निजी स्वार्थ पूरे किए जा सकें."

रैली में सोनिया गाँधी ने पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति पर भी संक्षिप्त टिप्पणी की और कहा कि पड़ोसी देश में चिंताजनक घटनाएं हो रही है.

चुनावी बात

सोनिया ने दिल्ली की जनसभा में संयुक्त प्रगितशील गठबंधन (यूपीए) सरकार की उपलब्धियों का ख़ूब बखान किया और एक तरह से सरकार का रिपोर्ट कार्ड पेश किया.

 जिस पार्टी के इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी जैसे नेताओं ने अपने देश की एकता के लिए अपने प्राणों तक का बलिदान दिया हो, उस पार्टी को आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में किसी के प्रमाण पत्र की ज़रूरत नहीं है
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी

उनका कहना था कि यूपीए सरकार ने अपने कार्यकाल में किसानों के क़र्ज़े माफ़ किए, रोज़गार गारंटी योजना चलाई, अमरीका के साथ परमाणु क़रार को अपनी शर्त्तों पर पूरा किया और सरकार की कोशिशों की वजह से भारत में आर्थिक मंदी का असर नहीं है.

सोनिया गाँधी का यह भी कहना था कि जब दुनिया में तेल की क़ीमतें बढ़ रही थीं तो उनकी सरकार ने पेट्रौल, डीज़ल और एलपीजी यानी घरेलू गैस की क़ीमतों में कमी की है.

उन्होंने दिल्ली विधानसभा चुनाव में जनता के जनादेश का ज़िक्र करते हुए लोगों से आहवान किया कि उस बार आपका फ़ैसला सही था और इस बार भी विकास को आधार बनाकर अपना फ़ैसला करें और सही निर्णय लें.

वर्ष 2004 के लोकसभा के चुनावों में दिल्ली की सात लोकसभा सीटों में से छह पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी जबकि एक सीट भाजपा के खाते में गई थी. जबकि पिछले 11 साल से दिल्ली राज्य में कांग्रेस पार्टी की सरकार है.

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