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मंगलवार, 28 अप्रैल, 2009 को 22:00 GMT तक के समाचार
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महिलाओं से जुड़ी योजनाओं का है असर

लाड़ली लक्ष्मी योजना
भाजपा ने लाड़ली लक्ष्मी योजना को देश भर में लागू करने का वायदा किया है

भारतीय जनता पार्टी ने जब आम चुनाव के लिए घोषणा पत्र जारी किया तो उसमें जो वायदे थे उनमें जगह मिली मध्य प्रदेश से शुरू हुई लाड़ली लक्ष्मी योजना को भी.

पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी घोषित हुए लालकृष्ण आडवाणी ने अपने ब्लॉग में भी इसका ज़िक्र किया था कि वह इस योजना को पूरे देश में लागू करना चाहते हैं.

इस योजना को देश भर में लागू करने पर इतना ज़ोर क्यों है इसका अंदाज़ा मध्य प्रदेश पहुँचकर लगता है.

मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्त्व में भाजपा ने कुछ महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी और विश्लेषकों का मानना है कि लाड़ली लक्ष्मी और सामूहिक विवाह जैसी योजनाओं ने उन्हें बड़े पैमाने पर महिलाओं का वोट दिलवाया.

ग़रीबी, बेरोज़गारी, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा या महँगाई तो कुछ ऐसे मुद्दे हैं जो शायद हर चुनाव में हर जगह समान रूप में दिखाई देते हैं.

मगर मध्य प्रदेश में ये दोनों योजनाएँ भाजपा को एक मुद्दे के रूप में फ़ायदा पहुँचाती दिखती हैं.

शिवराज सिंह चौहान
शिवराज सिंह चौहान को पिछला विधानसभा चुनाव जिताने का श्रेय दिया जाता है

लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में मध्य प्रदेश की 16 सीटों के लिए मतदान होना है.

इन योजनाओं का असर देखने मैं पहुँची राहतगढ़. ये सागर संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है.

वहाँ मेरी मुलाक़ात हुई नीलेश से जिनके घर में हाल ही में लड़की हुई है और उन्होंने लाड़ली लक्ष्मी योजना का फ़ायदा उठाने के लिए फ़ॉर्म भर दिया है.

उन्हें इसके बारे में आंगनबाड़ी से पता चला.

नीलेश को इस योजना से फ़ायदे की उम्मीद है क्योंकि वह ऐसे और लोगों को जानते हैं जिनके फ़ॉर्म पास हो चुके हैं.

इस योजना के तहत लड़की को स्कूल भेजने पर उसकी पढ़ाई के लिए राशि मिलती है और साथ ही 21 वर्ष की आयु में लड़की को एक लाख रुपए की राशि दी जाती है.

मगर इसके लिए ज़रूरी है कि लड़की ने 12वीं कक्षा तक की स्कूली शिक्षा प्राप्त की हो.

इस योजना का पात्र बनने के लिए कई नियम भी हैं, जैसे ये आवश्यक है कि आप कोई कर न देते हों और आपको एक शपथ पत्र देना होता है कि आपके दो से ज़्यादा बच्चे नहीं होंगे वर्ना योजना ख़ारिज हो जाएगी.

सामूहिक विवाह

दूसरी योजना है सामूहिक विवाह की जिसमें आपकी लड़की की शादी का सारा ख़र्च सरकार उठाती है और किसी भी जाति या धर्म के लोग इन सामूहिक विवाहों का हिस्सा बन सकते हैं.

 इन दोनों योजनाओं का प्रभाव शहर में चाहे कम हो मगर गाँव में काफ़ी है. मेरे विचार से तो विधानसभा चुनाव में महिलाओं के मतदान में जो बढ़ोत्तरी दिखी उसकी भी वजह ये योजनाएँ ही थीं
एपीएस चौहान, राजनीतिक विश्लेषक

साथ ही सरकार कुछ रुपए और घर के लिए सामान भी लड़की को देती है.

जब मैंने देवास संसदीय क्षेत्र में स्थित शुजालपुर गाँव में कुछ महिलाओं से सामूहिक विवाह के बारे में पूछा तो कुछ ने इसके बारे में सुना तक नहीं था लेकिन दो महिलाएँ ऐसी मिलीं जिनके घर में ही लड़कियों की शादी सामूहिक विवाह में हो चुकी थी.

राजनीतिक विश्लेषक एपीएस चौहान का कहना है कि इन योजनाओं की वजह से शिवराज सिंह चौहान को कुछ महीने पहले हुए विधान सभा चुनाव में फायदा हुआ था.

वह कहते हैं, "इन दोनों योजनाओं का प्रभाव शहर में चाहे कम हो मगर गाँव में काफ़ी है. मेरे विचार से तो विधानसभा चुनाव में महिलाओं के मतदान में जो बढ़ोत्तरी दिखी उसकी भी वजह ये योजनाएँ ही थीं."

वह मानते हैं कि इन योजनाओं का फ़ायदा भाजपा को लोकसभा चुनाव में भी हो सकता है.

लेकिन सब इस बात से सहमत हों ऐसा भी नहीं है.

स्थानीय वरिष्ठ पत्रकार एनडी शर्मा का मानना है की थोड़ा बहुत काम हो रहा होगा लेकिन प्रचार ज़्यादा हो रहा है.

उनके अनुसार पानी की समस्या और अशिक्षा जैसे मुद्दे मध्य प्रदेश में प्रमुख हैं और उससे भी बड़ा मुद्दा है स्वास्थ्य का और विपक्ष में बैठी कांग्रेस पार्टी भी इन मुद्दों का फ़ायदा उठाने में अक्षम रही है.

अब ये योजनाएँ वास्तव में कितनी सफल होंगी ये तो फ़िलहाल नहीं कहा जा सकता मगर कम से कम ये योजनाएँ भाजपा को वोट के रूप में फ़ायदा दिलाती तो दिख ही रही हैं.

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