‘एक हफ़्ते से न तो ज़मीन देखी, न सड़क’

उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में बाढ़

इमेज स्रोत, Samiratmaj Misrha

    • Author, समीरात्मज मिश्र
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

उत्तर प्रदेश में बाढ़ से सबसे ज़्यादा प्रभावित ज़िलों में से एक है इलाहाबाद.

गंगा और यमुना नदी ने तीन तरफ़ से शहर को घेर रखा है. यही कारण है कि जब इन दोनों नदियों में लबालब पानी भर गया है तो शहर में दूर तक सिर्फ़ पानी ही पानी दिख रहा है.

उसके अलावा कुछ दिख रहा है तो पानी में डूबे पेड़, घर, मंदिर या फिर बिजली के ऊंचे खंभे.

हालांकि दो दिन से गंगा और यमुना नदियों के जलस्तर में उस रफ़्तार से बढ़ोत्तरी नहीं हुई जैसी कि पिछले पांच छह दिनों से हो रही थी, लेकिन प्रभावित इलाक़ों में लोगों की परेशानी में कोई कमी नहीं आई है.

संगम के आस-पास के इलाक़े से लेकर, करैली, म्योराबाद, सलोरी, छोटा बघाड़ा जैसे इलाक़े बाढ़ से सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं.

उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में बाढ़

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इन इलाक़ों में बाढ़ का पानी रिहायशी इलाकों में काफी अंदर तक भरा हुआ है और अधिकतर मकानों की एक मंज़िल तो पूरा तरह डूब गई है.

जिन लोगों के मकान दो या ज़्यादा मंज़िलों के हैं उनके लिए तो कुछ राहत है लेकिन एक मंज़िल वाले लोगों को या तो छत पर गुज़ारा करना पड़ रहा है या फिर वो यहां से चले गए हैं.

सलोरी इलाक़े में ऐसे ही एक मकान की दूसरी मंज़िल पर बने दो कमरों में लगभग दस परिवारों का गुज़ारा हो रहा है.

यहां की महिलाओं का कहना था कि उन्हें यहां से निकले एक हफ़्ते से ज़्यादा हो गया है और तब से ज़मीन या सड़क के दर्शन नहीं हुए हैं.

चूंकि हर जगह पानी भरा होने के कारण एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए भी सिर्फ़ नावें ही सहारा हैं.

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प्रशासन का दावा है कि बाढ़ प्रभावित इलाक़ों में सैकड़ों नावें लगाई गई हैं लेकिन यदि सलोरी की ही बात करें तो यहां तीन या चार से ज़्यादा नावें नहीं दिखीं, जबकि प्रभावित लोगों की संख्या हज़ारों में है.

लोगों का कहना है कि नाव के लिए देर तक इंतज़ार करना पड़ता है.

इलाहाबाद के ज़िलाधिकारी संजय कुमार कहते हैं कि बाढ़ वाले इलाक़े से लोगों को ऊपरी स्थानों पर भेज दिया गया है और राहत टीमें अपना काम कर रही हैं.

इलाहाबाद में राहत सामग्री बाँटने के लिए हेलीकॉप्टर का भी इस्तेमाल किया जा रहा है, एनडीआरएफ़, पीएसी और दूसरे बल लगे हैं लेकिन लोग ऐसा नहीं मानते और प्रशासनिक मदद से संतुष्ट भी नहीं हैं.

करैली, सलोरी, बघाड़ा इलाक़ों में लोगों का कहना है कि राहत सामग्री एक या दो बार दी गई वो भी बहुत कम लोगों को.

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सलोरी में रह कर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे कुछ युवकों का कहना था कि उन लोगों ने ख़ुद खाद्य सामग्री इकट्ठा करके नाव से उन लोगों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं जिनके घर से बाहर निकलना भी सीढ़ी और नाव के बिना संभव नहीं है.

बहरहाल पिछले दो तीन दिनों से बारिश न होने और नदियों के जलस्तर में स्थिरता आने से लोगों ने राहत की सांस ज़रूर ली है, लेकिन झांसी के माताटीला बांध से एक बार फिर पानी छोड़े जाने के कारण जलस्तर में बढ़ोत्तरी होने की संभावना है.

बाढ़ ने फ़िलहाल तो जन-जीवन तहस नहस किया ही है, इसके बाद बीमारी और महामारी की चिंता भी स्थानीय लोगों को सताए जा रही है.