'शिवसेना को धर्म का ठेकेदार किसने बनाया?'

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दही हांडी पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर शिवसेना की टिप्पणी सोशल मीडिया पर लोगों की चर्चा केंद्र है.
शिव सेना ने अपने मुखपत्र सामना में कहा है कि गणोशोत्सव, दही-हांडी और नवरात्रि के त्योहार आस्था का हिस्सा हैं और अदालतें इस मुद्दे पर <link type="page"><caption> 'लक्ष्मण रेखा'</caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/india/2016/08/160820_shivsena_court_lakshmanrekha_cross_pu" platform="highweb"/></link> पार न करे.

सुप्रीम कोर्ट ने अहम आदेश देते हुए कहा था कि 18 साल से कम उम्र के लोग दही हांडी में हिस्सा नहीं लेंगे और दही हांडी का पिरामि़ड 20 फीट से ऊंचा नहीं होना चाहिए.
इस ख़बर के बाद से भारत में सोशल मीडिया पर 'लक्ष्मण रेखा' ट्रेंड कर रहा है.

अमित ठंडानी ने लिखा, "शिव सेना ख़ुद कई जगहों पर दही हांडी आयोजित करती हैं. देखते हैं इस बार वे कोर्ट के जजमेंट की लक्ष्मण रेखा पार कर पाती है या नहीं."

प्रतीक भूमिया लिखते हैं, "कौन लक्ष्मण रेखा पार कर रहा है? शिवसेना को धर्म का ठेकेदार किसने बना दिया, कबसे?"

प्रशांत सिंह ने लिखा है, "अब एक राजनीतिक पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट को लक्ष्मण रेखा न पार करने को कहा है. वाह! बस यही बाक़ी रह गया था."
चंद्रगुप्त आचार्य ने लिखा है, "केवल धार्मिक मान्यताओं की बात नहीं है. यह संविधान द्वारा दिए गए स्वतंत्रता के अधिकार के ख़िलाफ़ है."

वरुण महाजन ने लिखा, "मैं शिवसेना का समर्थन नहीं करता लेकिन मुझे लगता है कि सुप्रीम कोर्ट हिंदू आस्थाओं के मामले में अपनी लक्ष्मण रेखा पार कर रही है."
माधव नाम के एक ट्विटर हैंडल ने लिखा, "मैं उद्धव ठाकरे से सहमत हूं. क्या कोर्ट के पास मुहर्रम के संबंध में ऐसा आदेश देने की हिम्मत है? सिर्फ़ हिंदू त्योहारों पर ही क्यों?"

सनी सुनील पाटिल ने लिखा, "सुप्रीम कोर्ट को हिंदू आस्थाओं के बारे कहने का कोई अधिकार नहीं. उन्हें इनका सम्मान करना चाहिए, वैसे ही जैसे वे दूसरी आस्थाओं का करते हैं. कृपया लक्ष्मण रेखा न पार करें."
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