अब शराबबंदी की मार महिलाओं पर?

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    • Author, मनीष शांडिल्य
    • पदनाम, पटना से, बीबीसी हिन्दी डॉट कॉम के लिए

"न, न... महिला लोगों को कैसे गिरफ़्तार कर लेंगे?"

"ये ग़लत बात है. जो जेंट्स लोग पीते हैं उसको गिरफ़्तार कीजिए, महिला लोग दारु पीती हैं कि आप उसको गिरफ़्तार कीजिएगा."

"जेंट्स लोग घर में लाकर शराब रख देगें तो इसमें हमलोगों की क्या ग़लती है."

ये प्रतिक्रियाएं पटना के नाला रोड इलाक़े में बने अंबेडकर भवन में रहने वाली कुछ महिलाओं की हैं. अभी चर्चा में बने हुए बिहार मद्य निषेध और उत्पाद विधेयक 2016 के कुछ प्रावधानों पर उनकी राय जानने मैं शनिवार को वहां पहुंचा था.

इस नए क़ानून के मुताबिक़ किसी घर में शराब मिलने पर अब महिलाओं समेत उस घर के सभी बालिग़ सदस्यों को दोषी माना जाएगा और उन पर क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी.

एक दूसरे प्रावधान के मुताबिक़ अगर कोई गांव या शहर या उसका कोई इलाक़ा या समुदाय विशेष, इस क़ानून को बार-बार तोड़ेगा तो उस इलाक़े के सभी लोगों पर सामूहिक जुर्माना लगेगा. कहा जा रहा है कि इसकी मार भी महिलाओं पर पड़ेगी.

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हालांकि चाहे अंबेडकर भवन की ये महिलाएं हों या फिर कोई महिला संगठन, वे आम तौर पर मानती हैं कि अप्रैल में लागू हुए शराबबंदी के बाद महिलाओं का जीवन बेहतर हुआ है.

नीतीश कुमार ने महिलाओं की मांग पर शराबबंदी की घोषणा की थी और उसे लागू किया.

नीतीश सरकार भी पूर्ण शराबबंदी के अपने फ़ैसले के बाद कई मौक़ों पर यह दोहरा चुकी है कि इस फ़ैसले से सबसे ज़्यादा महिलाएं ख़ुश हैं. लेकिन शराबबंदी के नए विधेयक के कुछ प्रावधानों को लेकर महिलाओं के बीच नाराज़गी है. वे चिंतित हैं.

निवेदिता झा बिहार महिला समाज की कार्यकारी अध्यक्ष हैं.

इन प्रावधानों का विरोध करते हुए वो कहती हैं, "शराब पीने और रखने के निर्णय में पुरुष महिलाओं को शामिल नहीं करते. ऐसे में इस नए क़ानून के बाद उन पर ख़तरा बढ़ गया है. अगर महिलाएं घर में शराब पीने का विरोध करेंगी तो प्रताड़ित होंगी और चुप रहेंगी तो पुलिस ही हिंसा का सामना करेंगी. अब महिलाएं ऐसे अपराध के लिए पकड़ी जाएंगी जो उन्होंने किया नहीं है."

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निवेदिता के मुताबिक़ कई महिला संगठन एक साथ बैठकर इन प्रावधानों का विरोध करने की आगे की रणनीति तैयार करेंगी.

वहीं सरकार का कहना है कि इन प्रावधानों का मक़सद महिलाओं को इस बात के लिए तैयार करना है कि वे अपने पति या बेटे को शराब पीने से मज़बूती से रोकें.

जैसा कि उत्पाद, मद्य निषेध और निबंधन मंत्री अब्दुल जलील मस्तान बताते हैं, "हमारी मंशा औरतों को जेल ले जाने की नहीं है. प्रावधानों के कारण पत्नी-बेटी जब सब मिलकर घर में शराब का विरोध करेंगे तो निश्चित रूप से उस शख़्स को मानना पड़ेगा."

लेकिन विधि विशेषज्ञों का कहना है कि सज़ा का प्रावधान क्या है और क्यों सज़ा दी जाए, इन मूलभूत बातों से हटकर नया विधेयक तैयार किया गया है.

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पटना हाई कोर्ट के सीनियर एडवोकेट दीनू कुमार कहते हैं, "अपराध के सिद्धांत पर विचार किए बिना नया क़ानून बनाया जा रहा है जो असंवैधानिक है. नया क़ानून यह बताता है कि दंड के प्रति विधायिका की सोच क्या है."

दीनू के मुताबिक़ क्रिमिनॉलोजी में अपराध करने वाला या उसे करने में सहयोग करने वाला ज़िम्मेवार होता है. लेकिन नया क़ानून इसकी भी अनदेखी करता है.

जानकारों का कहना है कि जब इस क़ानून से जुड़े मामले अदालत के सामने आएंगे तो वे वहां नहीं टिक पाएंगे. वहीं नए क़ानून के इन प्रावधानों का विपक्ष भी पुरज़ोर विरोध कर रहा है.

सरकार ने यह नया मद्य निषेध विधेयक विधानमंडल से पास करा लिया है और इसे अभी राज्यपाल की मंज़ूरी मिलनी बाक़ी है.

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