'खुले में शौच' मुहिम में गांधीजी का चौथा बंदर

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- Author, शुरैह नियाज़ी
- पदनाम, भोपाल से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
'खुले में शौच' के ख़िलाफ़ चलने वाली मुहिम को लेकर मध्यप्रदेश का हरदा ज़िला हमेशा ही सुर्खियों में रहा है.
लेकिन इस बार प्रशासन गांधीजी के तीन बंदरों की जगह चौथे बंदर की मदद लेने जा रहा है.
गांधीजी के तीन बंदर संदेश देते हैं कि बुरा मत देखो, बुरा मत बोलो, बुरा मत सुनो.
वहीं चौथा बन्दर 'खुले में मत हगो' यानी खुले में शौच मत करो का संदेश टी-शर्ट पर देता दिखाई दे रहा है.
हरदा ज़िले को 'खुले में शौच' मुक्त बनाने के लिए आयोजित समीक्षा बैठक में इसकी शुरुआत आईएएस निपुण विनायक ने की.
अब ज़िले के अधिकारियों का मानना है कि लोगों को संदेश देने के लिए ये एक बेहतर तरीक़ा है.
कलेक्टर हरदा श्रीकांत बनोठ का कहना है, "हरदा को जल्द से जल्द 'खुले में शौच' से मुक्त किया जाना है. गांधीजी के बंदरों वाले टी-शर्ट से हम स्पष्ट संदेश लोगों को दे सकते हैं. मैदानी अमले को इसे पहनाने का विचार है."
लेकिन टी-शर्ट के इस संदेश को कुछ लोग अमर्यादित भाषा भी मान रहे हैं.
लोगों का कहना है कि संदेश देने के लिए अच्छी भाषा का भी उपयोग किया जा सकता है.
इससे पहले शौचालय को लेकर हरदा प्रशासन के चलाए जा रहे अभियान के ख़िलाफ़ लोग खड़े हो गये थे.

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इसके प्रचार-प्रसार के तरीक़े को लेकर लोगों का विरोध था.
हरदा ज़िले में लगाए गये होर्डिंग में खुले में शौच करने वालों की तुलना कुत्ते से की गई थी.
इसमें एक व्यक्ति और कुत्ते को खुले में शौच करते हुए दिखाया गया था.
उस पर लिखा था, "जानवर शौचालय का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं, लेकिन आप कर सकते हैं. क्या आपने अपना शौचालय बनाया है."
लेकिन इसका असर कुछ ऐसा हुआ कि लोगों ने पत्थर मार-मारकर इस होर्डिंग को ख़राब कर दिया.
लोगों को इस होर्डिंग से आपत्ति थी और उन्हें महसूस हो रहा था कि ये अपमान किया जा रहा है बजाए जागरुकता पैदा करने के.
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