महमूद फ़़ारूक़ी को सात साल की सज़ा

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दिल्ली की एक विशेष फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट ने 'पीपली लाइव' फ़िल्म के सह-निर्देशक, इतिहासकार और दास्तानगो महमूद फ़ारूक़ी को बलात्कार के मामले में सात साल की सज़ा सुनाई है.
जज संजीव जैन ने महमूद फ़ारूक़ी को धारा 376 के तहत दोषी पाया था जिसमें उन्हें न्यूनतम सात साल जेल की सज़ा सुनाई.
महमूद फ़ारूक़ी को पिछले साल दिल्ली के सुखदेव विहार में उनके घर पर एक अमरीकी महिला से बलात्कार का दोषी पाया गया है.
दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को फ़ारूक़ी के लिए आजीवन कारावास की सज़ा की मांग की थी.
पुलिस ने दलील दी थी कि उन्होंने अमरीकी रिसर्च स्कॉलर महिला से बलात्कार कर देश को बदनाम किया है. पुलिस ने ये भी कहा था कि फ़ारूक़ी समाज में एक उच्च स्थान रखते हैं इसलिए सही व्यवहार करने की उनकी ज़िम्मेदारी बढ़ जाती है.
महिला ने फ़ारूक़ी पर आरोप लगाया था कि वो अपने शोध के सिलसिले में उनसे मिलने गई थी तब फ़ारूकी ने उनके साथ बलात्कार किया.
महिला ने अदालत को बताया था कि बलात्कार के बाद फ़ारूक़ी ने कई ई-मेल लिखकर उनसे माफ़ी मांगी थी. ईमेल और फ़ोन-कॉल डिटेल को मुकदमे में सबूत के तौर पर पेश किए गए थे.

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महमूद फ़ारूक़ी की पत्नी अनुषा रिज़वी 2010 में बनी 'पीपली लाइव' की निर्देशक थीं और फ़ारूक़ी इस फ़िल्म के लेखक और सह निर्देशक थे.
महमूद रोड्स स्कॉलर रहे हैं. उन्होंने दून स्कूल और बाद में सेंट स्टीफ़ेंस से पढ़ाई की.
उनकी किताब 'इन बिसीज्डः वायसेज फ़्रॉम दिल्ली 1857' काफ़ी चर्चित रही.
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