महबूबा सरकार की अलगाववादियों से गुहार

महबूबा मुफ़्ती

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    • Author, रियाज़ मसरूर
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर

एक मुठभेड़ में चरमपंथी बुरहान वानी की मौत के बाद भारत प्रशासित कश्मीर विरोध प्रदर्शनों में सुलग रहा है.

शांति बहाली के लिए महबूबा मुफ़्ती सरकार ने राजनीतिक दलों और अलगाववादी नेताओं से मदद की गुहार लगाई है.

राज्य सरकार के प्रवक्ता नईम अख़्तर ने कहा, ''हम कश्मीर में शांति बहाल करने के लिए राजनीतिक दलों, ख़ास तौर पर अलगाववादी नेताओं से मदद की अपील करते हैं.''

बुरहान वानी

महबूबा मुफ़्ती ने पहले ही कहा है कि निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर 'ज़रूरत से ज़्यादा बल' प्रयोग किया गया.

पिछले हफ़्ते पुलिस ने 21 साल के हिज़्बुल मुजाहिद्दीन कमांडर बुरहान वानी और उसके दो साथियों की मुठभेड़ में मौत का दावा किया था. लेकिन उसके बाद भड़के हिंसक प्रदर्शन में 30 लोगों की मौत हो गई और लगभग सौ पुलिसकर्मियों समेत 300 लोग घायल हुए हैं.

राज्य में कई जगह कर्फ्यू लगा हुआ है और मोबाइल इंटरनेट बंद है. दो दिन बंद रहने के बाद अमरनाथा यात्रा सोमवार फिर शुरू हुई.

भारत प्रशासित कश्मीर

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पीटीआई ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के हवाले से कहा- 'हमें भरोसा है कि हम इसका समाधान खोजने में सक्षम हैं."

राजनाथ सिंह

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केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने राजनीतिक हल के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से फ़ोन पर बात की है.

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि वो मदद के लिए तैयार हैं, लेकिन ये भी कहा कि मुख्यमंत्री को खुद आगे आकर स्थिति संभालनी चाहिए.

मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़

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लंबे समय से नज़रबंद अलगाववादी संगठन हुर्रियत कांफ्रेंस ने महबूबा मुफ़्ती सरकार के बयान पर प्रतिक्रिया दी है.

हुर्रियत नेता मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ ने वीडियो बयान में कहा, ''हम कैसे मदद कर सकते हैं अगर हमें घर से बाहर निकलने की इजाज़त ही नहीं है. हम जुमे की नमाज़ में भी हिस्सा नहीं ले सकते. सरकार ताकत के बल पर राज कर रही है. जब जम्मू-कश्मीर में बल के आधार पर शासन चलाने की नीति चल रही है, तब तक हालात बेहतर नहीं हो सकते हैं.''

अलगाववादी नेताओं मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़, सैयद गिलानी, यासीन मलिक और शब्बीर शाह ने एक साझा बयान में सरकार की अपील को बचकाना बताया.

इस बयान के मुताबिक, ''सरकार को विरोध प्रदर्शन को गोलीयों से रोकने की नीति छोड़नी चाहिए. शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन रोके जा सकते हैं. भारतीय सेना लोगों को मारने के बहाने खोजती रहती है.''

भारत प्रशासित कश्मीर

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विश्लेषक एजाज़ अहमद ने कहा, "जब कश्मीर जल रहा होता है तब सरकार अलगाववादियों की तरफ़ देखती है लेकिन जब शांति कायम हो जाती है तब ये नेता जेल में या घर में नज़रबंद कर दिए जाते हैं."

उन्होंने कहा, "इस तरह के अनुभवों के कारण केंद्र के साथ बातचीत को जो सामाजिक मान्यता प्राप्त थी, वो ख़त्म हो गई है. भाजपा के समर्थन वाली राज्य सरकार के लिए ऐसी बातचीत करना मुश्किल होगा क्योंकि लोगों खुलेआम उग्र नेतृत्व का समर्थन करते हैं."

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