'केंद्र बताए, मोबाइल रेडिएशन कितना ख़तरनाक़'

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मोबाइल फ़ोन और टावर से निकलने वाले रेडिएशन से जनता को बचाने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और टावर लगाने वाली कंपनी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

नरेश चंद गुप्ता ने अपनी याचिका में कहा था कि मोबाइल टावर और फ़ोन से निकलने वाला रेडिएशन लोगों और जानवरों के लिए ख़तरनाक है. इससे सिरदर्द, अनिद्रा के अलावा ब्रेन ट्यूमर तक होने का ख़तरा रहता है.

याचिका में कहा गया है कि केंद्र इसके लिए विदेशों की तरह वैज्ञानिक शोध के आधार पर नियम तय करे और कालोनियों, स्कूलों, अस्पतालों और बाज़ारों से 500 मीटर दूर ही टावर लगाए जाएं. इन इलाक़ों में जो मोबाइल टावर लगाए गए हैं, उन्हें हटाया जाए.

इससे पहले, प्रशांत भूषण की अगुवाई वाले गैर सरकारी संगठन ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाख़िल कर दावा किया था कि मोबाइल टावर से होने वाले रेडिएशन से ख़तरनाक बीमारियां होती हैं.

याचिका में दुनियाभर में हुए शोध का हवाला देते हुए कहा गया है कि मोबाइल टावरों से होने वाले रेडिएशन से कैंसर, अलजाइमर और ल्यूकेमिया जैसी ख़तरनाक बीमारियां हो सकती हैं.

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2011 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि मोबाइल फ़ोन के इस्तेमाल से कैंसर होने की संभावना रहती है.

संगठन की कैंसर रोधी एजेंसी ने कहा था कि सबूतों की समीक्षा करने पर पता चला कि मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल करने से एक विशेष तरह के कैंसर की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

हालाँकि एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में ये भी कहा था, “यह स्पष्ट रूप से स्थापित नहीं हो पाया है कि मोबाइल फ़ोन से कैंसर होता है.”

इसी साल मई में केंद्रीय दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने लोकसभा में कहा था कि मोबाइल टावर के रेडिएशन से मानव जीवन पर किसी तरह के दुष्प्रभाव की बातें बेबुनियाद हैं और इसका कोई प्रमाण नहीं है.

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