सरकार में ऐसे लोग हैं जो रोज़ गुमराह कर रहे हैं: यशवंत

एनएसजी बैठक

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पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) में भारत की सदस्यता के लिए मोदी सरकार के प्रयासों की कड़ी आलोचना की है. विपक्षी कांग्रेस ने भी विफल रहे इन प्रयासों पर सरकार की कूटनीति की आलोचना की है.

सिन्हा के मुताबिक भारत को इस ग्रुप का हिस्सा बनने और इसकी सदस्यता के लिए अर्ज़ी देने की ज़रूरत ही नहीं थी.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, विदेश मंत्री रहे सिन्हा ने कहा, "भारत को एनएसजी की सदस्यता के लिए इतनी उत्सुकता दिखाने की कोई ज़रूरत ही नहीं है. मैं पूरा ज़ोर देकर कहना चाहता हूं कि भारत को एनएसजी की सदस्यता नहीं लेनी चाहिए. हमें उनके पास आवेदक के तौर पर नहीं जाना चाहिए. जो कुछ हमें मिलना था, हमें पहले ही मिल चुका है."

उनका कहना था, "मुझे नहीं पता कि जो लोग सरकार में बैठे हैं वो इसे समझते हैं या नहीं. लेकिन मुझे पता है कि सरकार में ऐसे लोग बैठे हैं जो उसे रोज़ाना गुमराह कर रहे हैं."

यशवंत सिन्हा

उनका बयान ऐसे वक्त पर आया है जब भारत ने, 48 देशों के एनएसजी समूह की सदस्यता पाने के लिए अपना दावा पेश किया है.

लेकिन भारत के दावे पर चीन समेत कई देशों का अलग मत था और भारत के दावे का विरोध हुआ. विरोध करने वाले कुछ देश नहीं चाहते कि जिस देश ने प्रमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, वो एनएसजी का सदस्य बने.

चीन प्रमुख रूप से इस मुद्दे पर भारत के एनएसजी सदस्यता का विरोध कर रहा है.

आनंद शर्मा ट्वीटर

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विपक्षी दल कांग्रेस के नेता आनंद शर्मा ने भी एनएसजी की सदस्यता के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति की आलोचना की है.

अपने ट्वीट में आनंद शर्मा ने लिखा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ये समझने की ज़रूरत है कि कूटनीति में गहराई और गंभीरता की आवश्यकता होती है सार्वजनिक स्तर पर तमाशे की नहीं."

विकास स्वरूप

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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा है कि परमाणु अप्रसार संघि पर भारत की साख के बारे में सबको पता है.

उन्होंने कहा, "मैं हार शब्द का इस्तेमाल नहीं करूंगा. लेकिन हां, हम जैस परिणाम चाहते थे वैसा नहीं हुआ."

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