ऑनलाइन सामान ख़रीदना होगा अब और महंगा

ई-कामर्स

इमेज स्रोत, Think Stock

    • Author, आशुतोष सिन्हा
    • पदनाम, टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट

इस हफ्ते मध्य प्रदेश सरकार ने ई-कॉमर्स पर टैक्स लगाने की घोषणा की है.

राज्य के वित्त मंत्री जयंत मलैया ने ये घोषणा फरवरी के बजट में की थी और अब इसे लागू कर दिया गया है.

ई-कॉमर्स के ज़रिये राज्य में आने वाले सामान पर छह फीसदी टैक्स लगाया जाएगा.

वित्त मंत्री ने ये साफ़ किया कि फ्लिपकार्ट और अमेज़न जैसे ई-कॉमर्स कंपनियों के बढ़ते प्रचलन से हो रहे नुक़सान को देखते हुए ये टैक्स लगाना पड़ रहा है.

सभी राज्यों में जहां ये टैक्स लग रहा है, उससे अब ग्राहकों पर बोझ पड़ेगा.

ई-कॉमर्स कंपनियों ने सामान भेजते समय ये शर्त लगा दिया है कि अगर राज्य सरकारें उनके सामान पर टैक्स लगाती हैं तो उसका भुगतान ग्राहकों को ही करना होगा.

ई-कामर्स

इमेज स्रोत, Think Stock

यानि अगर कर्नाटक से आपका सामान आ रहा है जिसपर आपने वैट या सेल्स टैक्स भर दिया है उसके बाद भी आपको ये टैक्स देना पड़ेगा.

मध्य प्रदेश से पहले कई और राज्यों ने ई-कॉमर्स पर टैक्स लगाने की घोषणा की है और उनकी भी दलील ये है कि उनके यहां राजस्व का नुकसान हो रहा है जिसके कारण ये टैक्स लगाना ज़रूरी हो गया है.

अप्रैल में हिमाचल प्रदेश ने भी इसकी घोषणा की थी. उत्तराखंड, असम, उत्तर प्रदेश, उड़ीसा, राजस्थान, मिजोरम और पश्चिम बंगाल की सरकारों ने ये टैक्स पहले से ही लागू करने का फैसला किया है.

ई-कॉमर्स कंपनियों को डर है कि दूसरे राज्य भी अब ऐसे ही टैक्स लगाने का सोच सकते हैं.

ई-कामर्स

इमेज स्रोत, Think Stock

तेज़ी से बढ़ रहे ई-कॉमर्स पर सरकारों के लिए टैक्स का नया ज़खीरा खुल सकता है.

उद्योग संगठन एसोचैम के अनुसार, भारत में लोगों के मार्च 2016 तक पूरे साले में ऑनलाइन खरीदारी के लिए करीब 38 बिलियन डॉलर या ढाई लाख़ करोड़ रुपये खर्च किये.

एक साल पहले लोगों ने करीब 23 बिलियन डॉलर या डेढ़ लाख़ करोड़ रुपये खर्च किये थे.

साल 2014 में इसे करीब एक लाख़ दस हज़ार करोड़ रुपये के बाज़ार के रूप में आंका गया था.

2015 से लेकर 2020 तक इसके पांच गुना बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है.

ई-कॉमर्स

सबसे ज़्यादा पैसे लोग रेल और प्लेन की टिकट बुक करने में खर्च करते हैं और ये ऑनलाइन खरीदारी का सबसे बड़ा हिस्सा है.

आईआरसीटीसी की वेबसाइट, जिसपर लोग रेल टिकट बुक करते हैं, देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी है.

फिलहाल ई-कॉमर्स के बड़े खरीदार महानगरों में ही बसे हैं. लेकिन जैसे-जैसे मोबाइल, इंटरनेट लोगों तक पहुंचेगा, और खरीदारों के देश के छोटे शहरों से भी आने की उम्मीद है.

ई-कॉमर्स

इंटरेनट सब्सक्राइबर के लिहाज़ से भारत अब, चीन के बाद, दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है.

लेकिन फिलहाल देश के एक तिहाई लोग भी इंटरनेट नहीं इस्तेमाल करते हैं.

जैसे-जैसे ये संख्या बढ़ेगी, ई-कॉमर्स और मोबाइल-कॉमर्स के और तेज़ होने की उम्मीद की जा सकती है.

इसीलिए सरकारों की नज़र ई-कॉमर्स पर पड़ना ही था.

पिछले साल दिल्ली सरकार ने ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए ये ज़रूरी कर दिया था कि वो उसे जो भी वहां सामान की डिलीवरी हो रही है उसके बारे में पूरी जानकारी दे.

ई-कामर्स

इमेज स्रोत, Thinkstock

इससे दिल्ली सरकार का उन कंपनियों को पहचानने में मदद मिली जो दिल्ली के लोगों तक सामान पहुंचाते हैं और टैक्स पूरी तरह से भर रहे हैं या नहीं.

दिल्ली, केरल और राजस्थान की सरकारें ये मानती हैं कि ई-कॉमर्स कंपनियां, दुकानदार नहीं हैं इसीलिए उन्हें ये जानकारी देने को कहा गया था.

ऐसा नहीं करने पर उनपर भारी जुर्माना की भी बात की गयी थी.

अलग-अलग सरकारों को ई-कॉमर्स की अहमियत इसीलिए समझ में आ रही है क्योंकि ये अब देश भर के लोगों की ज़रुरत को पूरी कर रहे हैं.

जिस भी राज्य में किसी सामान की मैन्युफैक्चरिंग नहीं होती है वहां के लोग ऐसे सामान की ख़पत कर रहे हैं, जो एक राज्य में बनकर दूसरे से होती हुई तीसरी में बिक रही है.

अमेज़न

इमेज स्रोत, Getty

ऐसे सामान पर आम तौर पर सरकार को कोई टैक्स नहीं मिलता है. कुछ राज्य सरकारें ऐसे ही सामान पर टैक्स लगाने की कोशिश कर रही हैं.

राज्यों की इस कोशिश के खिलाफ़ ई-कॉमर्स कंपनियां अदालत तक पहुंच गयी हैं.

अमेज़न ने गुजरात सरकार के टैक्स के खिलाफ़ हाई कोर्ट में अर्जी दी है और फ्लिपकार्ट ने उत्तराखंड और गुजरात सरकार के टैक्स के खिलाफ़ अलग अर्जी दी है.

उनका कहना है कि अगर इन सरकारों को टैक्स लगाना है तो वो उन्हें मैन्युफैक्चरिंग करने वालों पर लगाना चाहिए और "ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस" पर नहीं.

राज्यों के लिए ऐसे छोटी इकाइयों को ढूंढ निकालना और उनपर टैक्स लगाना आसान नहीं है इसलिए उन्होंने ई-कॉमर्स कंपनियों को अपना निशाना बनाया है.

फ्लिपकार्ट

इमेज स्रोत, FLIPKART

अलग-अलग सरकारों के इस फैसले का असर नागरिकों पर दिखाई दे रहा है.

2013 में फ्लिपकार्ट ने उत्तर प्रदेश में 10000 रुपये से ऊपर का कोई भी सामान डिलीवर करने से मना कर दिया.

<link type="page"><caption> इस रिपोर्ट के</caption><url href="www.medianama.com/2013/06/223-flipkart-wont-deliver-orders-more-than-10k-to-uttar-pradesh-capitalmind" platform="highweb"/></link> अनुसार राज्य में 'बिक्री कर' के नियम इतने टेढ़े-मेढ़े हैं कि कंपनियों के लिए उनका पालन करना नहीं के बराबर है.

इस फैसले का एक कारण ये भी था कि कंपनी ने पाया कि लोगों ने चोरी किये हुए क्रेडिट कार्ड से ऑनलाइन खरीदारी की थी.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक कर</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link> सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)