रजनी, कबाली, और फर्स्ट शो के लिए हवाई यात्रा

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- Author, टी एस सुधीर
- पदनाम, हैदराबाद से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
फ़िल्म देखने के लिए हवाई यात्रा! क्या ऐसा कभी हो सकता है?
हां, अगर आप मेगा सुपरस्टार रजनीकांत के फैन हैं, तो ऐसा आप कर सकते हैं.
स्मिथा सरमा रंगनाथन 180 दूसरे फ़ैन्स के साथ विशेष विमान से बैंगलुरू से मेगास्टार की नई फ़िल्म 'कबाली' देखने जा रही हैं.
स्मिथा ने महज़ फ़िल्म देखने जाने के लिए 7,860 रुपये का प्लेन टिकट ख़रीदा है.
36 साल की ब्रांड संचार विशेषज्ञ स्मिथा कहती हैं, "रजनी फ़िल्म का असल जुनून तो आप केवल चेन्नई में ही महसूस कर सकेंगे."
रजनीकांत की नई फ़िल्म 15 जुलाई को रिलीज़ हो रही है.
स्मिथा 'फर्स्ट डे, फर्स्ट शो' देखने के बाद स्मिथा बैंगलुरु से चेन्नई वापस लौट जाएंगी.
रजनीकांत के फ़ैन्स के विशेष तौर पर विमान से फ़िल्म देखने जाने को लेकर तमिल इंडस्ट्री में काफ़ी चर्चा है.
निर्माता सुरेश बाबू कहते हैं, "फ्लाइट का विचार मूल रूप से रजनीकांत उन्माद को बढ़ावा देना है और उसका हिस्सा बनाना है."

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चार दशकों से चले आ रहे करियर में 65 साल के रजनीकांत ने 170 से ज्यादा फिल्मों में काम किया, जिनमें ज्यादातर तमिल भाषा में हैं.
एशिया के सबसे महंगे एक्टरों में से एक रजनीकांत को भारत में सबसे विश्वसनीय सितारों में से एक माना जाता है.
रिलीज़ होने से पहले ही गैंगस्टर पर आधारित फिल्म कबाली ने फिल्म राइट की बिक्री में 30 मिलियन डॉलर कमा लिए हैं.
फिल्म, तेलुगू, हिंदी और मलय भाषाओं में भी डब की जाएगी.
उनकी 1995 कॉमेडी फ़िल्म मुथुवास को जापानी भाषा में डब किया गया था और वो जापान में काफ़ी हिट भी हुआ.
स्मिथा ने 1999 में पहली बार रजनीकांत की फिल्म 'पदयापत' तिरुनेलवेली शहर के एक छोटे से थिएटर में देखा था.
वो याद करते हुए कहती हैं, "जैसे ही रजनीकांत पर्दे पर आए लोग स्क्रीन पर पैसे फेंकने लगे. मैं एक हीरो के लिए ऐसी प्रतिक्रिया देखकर दंग रह गई थी."
इसके बाद दोस्तों से डीवीडी उधार लेकर उन्होंने रजनीकांत की 70 के दशके की ब्लैक एंड व्हाइट फिल्मों से लेकर सारी फिल्में देख डालीं.
वो हंसते हुए कहती हैं कि 2003 में उनका बेटा पैदा होने के समय जब वो प्रसव पीड़ा से गुज़र रही थीं तो उन्होंने तनाव दूर करने के लिए रजनीकांत की लगातार तीन कॉमेडी फिल्में, अरुणाचलम, मुथू और गुरु शिश्यन देखीं.
चेन्नई में रजनीकांत फैन्स उस दिन को किसी त्यौहार की तरह मनाते हैं जब उनकी कोई फ़िल्म रिलीज़ होती है.

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अगर उनकी कोई फ़िल्म अच्छी नहीं चलती, जैसे 2002 में बाबा और 2014 में लिंगा तो रजनीकांत अपनी जेब से फ़िल्म के वितरकों की क्षतिपूर्ति करते हैं.
रजनीकांत की इस नई फिल्म से काफी अपेक्षाएं हैं जिसमें वो एक बूढ़े होते डॉन का किरदार निभा रहे हैं.
कबाली फिल्म के टीज़र को अब तक 2 करोड़ 20 लाख़ बार देखा जा चुका है.
फिल्म आलोचक एल रविचंदर कहते हैं, "तिकड़म के बिना रजनीकांत क्या हैं?"
फिल्मों में आने से पहले रजनीकांत 1970 के शुरुआत में बैंगलुरु में 10A नंबर के बस में बतौर कंडक्टर काम करते थे.
उनका असली नाम शिवाजी राव गायकवाड़ है.
सुरेश बाबू प्रस्ताव देते हैं कि बैंगलुरु में रजनीकांत के काफ़ी फ़ैन्स हैं इसलिए स्पेशल बस चलाया जाना चाहिए जो फ़ैन्स को थिएटरों तक पहुंचा सके जहां कबाली फ़िल्म दिखाई जा रही हो.
"ज़रा सोचिए जब 10A नंबर बस में यात्रा करते वक्त रजनीकांत जैसे सजे बस कंडक्टर, फिल्म का पंच लाइन, 'कबाली वंदुतान दा' यानी 'कबाली आ गया है,' बोल रहे हों, तो आपको कैसा लगेगा."
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