मोदी के बनारस में महिलाओं को हथियारबंद ट्रेनिंग

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- Author, रोशन जायसवाल
- पदनाम, वाराणसी से, बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए
विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में महिलाओं को हथियारबंद ट्रेनिंग दे रहा है.
अयोध्या में वीएचपी के ट्रेनिंग कैम्प के वीडियो सामने आने के बाद काफ़ी विवाद हुआ था, वीएचपी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ा संगठन है.

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पिछले कुछ दिनों से बनारस में वीएचपी की महिला इकाई 'दुर्गावाहिनी' और 'मातृशक्ति' की हथियारबंद ट्रेनिंग जारी है, बताया जा रहा है कि आतंकियों से निबटने की तैयारी के तहत ये ट्रेनिंग दी जा रही है.
वाराणसी के वीएचपी कार्यालय के क़रीब भारतीय शिक्षा मंदिर नामक स्कूल में कुछ दिनों से चल रहे ट्रेनिंग कैम्प में 11 ज़िलों की 100 लड़कियाँ और महिलाएं शामिल हैं.

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ट्रेनिंग कैम्प की अधिकारी कमला मिश्रा ने बीबीसी को बताया कि "इस ट्रेनिंग का मक़सद लड़कियों और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और आतंकवादियों से लोहा लेना है".

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उन्होंने बताया, "महिलाओं को ये ट्रेनिंग इसलिए भी दी जा रही है, क्योंकि आतंकी महिलाओं के हाथो नहीं मरना चाहते हैं. आतंकी मानते हैं कि महिला के हाथों मरने के बाद उन्हें जन्नत नहीं मिलेगी और वो भाग जाते हैं.

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ट्रेनिंग के लिए पेशेवर ट्रेनर लगाए गए हैं, ट्रेनिंग लेने के लिए कुंडा क़स्बे से आई रूपाली बताती हैं कि इस ट्रेनिंग के जरिए वे आत्मरक्षा के साथ आतंकी से भी निपट सकती हैं.
एयर गन चलाने की ट्रेनिंग ले रही मोनी ने बताया कि वो ये ट्रेनिंग घरवालों की अनुमति से ले रहीं हैं ताकि इसके बाद वो अपने गाँव पहुँचकर और भी लोगों को सिखा सकें.

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कौशांबी ज़िले से आई सुषमा सोनकर ने बताया कि आज का जो समय चल रहा है, उसके मुताबिक़ लाठी, कराटे और राइफल चलाना आना चाहिए. वहीं अधेड़ उम्र की बनारस की प्रतिज्ञा देवी ने बताया कि वो ये ट्रेनिंग आत्मनिर्भर होने के लिए ले रहीं हैं.

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शिविर में ट्रेनर रिचा वर्मा ने बताया कि ऐसा नहीं है की इस कैम्प में सिर्फ बन्दूक चलाने की ही ट्रेनिंग दी जा रही है, यहँ लाठीबाज़ी,कराटे, योग और शरीर को फिट रखने का भी तरीका बताया जा रहा है.
वीएचपी के संगठन अधिकारी दिवाकर का कहना है कि देश पर जो संकट है उससे निबटने के लिए राष्ट्र रक्षा, समाज रक्षा और आत्मरक्षा के लिए ये 'शौर्य प्रशिक्षण शिविर' लगा है.

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उनका कहना है, "ज़रूरत पड़ने पर सेना की दूसरी पंक्ति के रूप में जहाँ बजरंग दल खड़ा होगा, उसी तरह से दुर्गावाहिनी की बहनें भी खड़ी होंगी. हर साल प्रांत के अलग-अलग हिस्सों में महिलाओं का शौर्य प्रशिक्षण शिविर लगता आया है और इस बार 10 साल बाद ये अवसर आया है जब काशी में ये शिविर आयोजित किया गया है".
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