जानवर को भी नसीब होगा श्मशान

इमेज स्रोत, NIRAJ SAHAI
- Author, नीरज सहाय
- पदनाम, पटना से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
मनुष्य और पशुओं के प्रेम की हज़ारों कहानियां हैं. आज भी जीवों को पालने- दुलारने और उनसे निःस्वार्थ रिश्ता रखने वाले कम नहीं हैं.
नाबार्ड की पटना शाखा के पूर्व प्रबंधक प्रवीण कुमार भी ऐसे ही जीव प्रेमी हैं.
वह घोड़ा, बंदर, कुत्ते और गाय पालते हैं, लेकिन इनमें से किसी का भी व्यवसायिक इस्तेमाल नहीं करते. पशुओं से उन्हें इतना लगाव है कि वे अपने बेटे की बारात में भी घोड़ा, बंदर और कुत्तों के साथ शामिल हुए थे.
जब वह लैब्राडोर नस्ल के अपने रॉकी को लेकर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद से मिलने पहुंचे तो लालू प्रसाद ने भी उनकी भावना का ध्यान रखते हुए रॉकी को कुत्ता नहीं “भैरव” कहा था.
प्रवीण कुमार ने पशुओं के साथ समय बिताने के लिए वीआरएस ले लिया था.
पशुओं से ऐसा ही लगाव डॉक्टर अजय आलोक को पिछले बीस साल से है.
सक्रिय राजनीति और सत्तारूढ़ दल जनता दल (यूनाइटेड) से जुड़े रहने के बावजूद वे अपने चार कुत्तों और तीन खरगोश के लिए अपने बेटे कुणाल के साथ समय निकाल लेते हैं.

इमेज स्रोत, NIRAJ SAHAI
लेकिन, इन दोनों के लिए सबसे कठिन समय वह होता है जब उनके किसी प्यारे जानवर की मृत्यु हो जाती है और शव को सम्मानजनक ढंग से अंतिम विदाई देने का कोई रास्ता नहीं सूझता.
पशु-प्रेमियों को कभी न कभी इस घड़ी का सामना करना पड़ता है और तब जरूरत महसूस होती है पशुओं के लिए एक विद्युत श्मशान की.
प्रवीण कुमार कहते हैं, "इस दुःख को शब्दों में बांधना बहुत मुश्किल है. रॉकी के शव को मैदान में गाड़ दिया था और घोड़े का शव नगर निगम वाले ले गए थे. घोड़े का अंतिम संस्कार कैसे हुआ, इसकी मुझे जानकारी नहीं है."
डॉक्टर अजय का भी यही मानना है. पिछले तीन सालों में उऩ्होंने अपने कुछ कुत्ते खोए हैं.
अजय के अनुसार तब उन्हें बहुत दुःख हुआ था. उन्हें शहर के बाहर खाली ज़मीन में दफनाना पड़ा था.
संयोगवश 2010 में पटना के समाजसेवी गुड्डू बाबा ने पशु श्मशान के लिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की.

इमेज स्रोत, NIRAJ SAHAI
गुड्डू बाबा बताते हैं कि आख़िरकार 2014 में मुख्य न्यायाधीश रेखा एम दोषित ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया.
राज्य सरकार को तलब किया गया. सरकार ने अदालत को पशु श्मशान (विद्युत् शवदाह-गृह) के लिए धनराशि और पटना में ज़मीन आवंटित किए जाने की जानकारी दी.
लंबी क़ानूनी लड़ाई के बाद 17 मार्च, 2016 को बिहार राज्य जल परिषद ने राजधानी में पशु श्मशान गृह की स्थापना की.
परिषद के तत्कालीन प्रबंध निदेशक और अब पटना नगर निगम के नए आयुक्त शीर्षत कपिल अशोक ने बताया कि यह बिहार ही नहीं, पूर्वी भारत का पहला विद्युत पशु शवदाह गृह है.
अगला पशु श्मशान भागलपुर में प्रस्तावित है. अब पशु प्रेमी अपने पालतू जानवरों को सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई दे सकेंगे.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)













