'भाजपा ने अपने पैर पर ख़ुद कुल्हाड़ी मारी'

कन्हैया कुमार

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देशद्रोह के आरोप में जेल में बंद जेएनयू छात्र संघ के नेता कन्हैया कुमार ज़मानत मिलने के बाद गुरुवार को जेल से निकलकर जेएनयू पहुंचे जहां उन्होंने छात्रों के साथ जेल के अपने अनुभव को साझा किया और आज़ादी के नारे लगाए.

उन्होंने राष्ट्रीय सवयंसेवक संघ (आरएसएस), अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा और कहा कि वे भारत से नहीं भारत को <link type="page"><caption> लूटने वालों से आज़ादी</caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/india/2016/03/160303_kanhaiya_jnu_sdp" platform="highweb"/></link> चाहते हैं.

उनके भाषण पर सोशल मीडिया में लोग तरह-तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं. ट्विटर पर #KanhaiyaKumar हैशटैग ट्रेंड कर रहा है जहां कई लोग उन्हें उभरते हुए नेता के रूप में देख रहे हैं तो कई तल्ख़ टिप्पणी भी कर रहे हैं.

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पीआर संजय ने लिखा है, “सीबीएसई ने स्कूलों को कहा है कि वे बच्चों को प्रधानमंत्री मोदी का ऐप डाउनलोड करने के लिए कहें. जेएनयू ने प्रधानमंत्री मोदी से कहा है कि वे मंत्रियों को कन्हैया कुमार की स्पीच डाउनलोड करने के लिए कहें.”

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देबरती ने लिखा है, “कन्हैया कुमार एक छोटे से छात्र नेता जेल से ज़मानत पर छूटे और टेलीवीज़न पर प्राइमटाइम में आ गए. मोदी को ऐसा करने के लिए 'वर्ष 2002' करना पड़ गया था. क्या नेता हैं!”

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अभय दुबे का कहना है, “एक ही तो कला थी भाषण देने की, आज एक आम आदमी ने उसमें भी हरा दिया. सत्यमेव जयते.”

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संजय झा का कहना है, “कन्हैया कुमार अब उस महान नेता चे ग्वारा की तरह हैं. एक युवा व्यक्ति जो उस भारत का संकेत है जो झुकने के लिए तैयार नहीं और अपने पर भरोसा करता है”

वहीं कई लोगों का मानना है कि मोदी सरकार ने इस मामले को अधिक तूल दे दिया.

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विनय लिखते हैं, “मोदी काका और उनकी सरकार ने ‘अपने पैर पे ख़ुद कुल्हाड़ी मारना’ मुहावरे का मतलब ढ़ूंढ लिया है. उन्होंने कन्हैया कुमार को एक स्टार बना दिया है.”

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संतोष कुमार का कहना है, “भाजपा राजनीतिक तौर पर इतनी अपरिपक्व है कि उन्होंने आप ही अपने दुश्मन बना लिए. भाजपा के लिए यह कितने शर्म की बात है.”

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हार्दिक राजगोर ने कन्हैया कुमार मामले में मीडिया पर निशाना साधा है और लिखा है, “मीडिया ने कन्हैया को कोर्ट में पेश होने से पहले पहले ही चरमपंथी करार दे दिया. अब बस एक स्पीच के बाद वे एक क्रांतिकारी नेता बन गए हैं. भारत बेवकूफ़ न बनो.”

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श्वेता सिंह कहती हैं कि कन्हैया बड़ी आसानी से हीरो बन गए. वे लिखती हैं, “एक भाषण से हीरो बन सकते थे. पागल थे सरहद पर खून बहा दिया.”

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गौरव तोड़नकर का कहना है, “कन्हैया कुमार, साधारण लोग आपके रुख का विरोध कर रहे हैं. अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर आप देश के दुश्मनों को सम्मान नहीं दे सकते.”

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