जम्मू कश्मीर में हो सकता है भाजपा का सीएम?

भाजपा चुनाव प्रचार

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    • Author, सलमान रावी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, नई दिल्ली

भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में जारी गतिरोध के बीच भारतीय जनता पार्टी ने संकेत दिए हैं कि अगर राज्यपाल ने उसे सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया तो वो पीछे नहीं हटेगी.

ऐसा उस सूरत में होगा, जब पीडीपी राज्यपाल को साफ़ तौर पर कह दे कि वो सरकार बनाना नहीं चाहती है.

1994 के मार्च महीने में सुप्रीम कोर्ट ने एसआर बोम्मई बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के मामले में फ़ैसला सुनाते हुए कहा था कि अगर सबसे बड़ा दल सरकार बनाने में असमर्थता ज़ाहिर करता है तो फिर राज्यपाल दूसरे सबसे बड़े दल से सरकार बनाने को कह सकते हैं.

मेहबूबा मुफ्ती

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बुधवार को बीबीसी से बात करते हुए भाजपा की जम्मू कश्मीर इकाई के प्रवक्ता अशोक कौल ने कहा कि उनकी पार्टी पीडीपी का इंतज़ार कर रही है और अगर पीडीपी पीछे हटती है तो फिर उनकी पार्टी दूसरे विकल्पों की तलाश करेगी.

कौल के मुताबिक, "अभी तो दस दिनों का समय है. हम पीडीपी से बातचीत कर रहे हैं. अब देखते हैं कि वो क्या करते हैं. हम तो उनके साथ तय साझा न्यूनतम कार्यक्रम को लेकर कटिबद्ध हैं. इसके बावजूद अगर वो पीछे हट जाते हैं तो फिर आगे देखा जाएगा."

शपथ ग्रहण समारोह

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इमेज कैप्शन, पिछले साल भाजपा और पीडीपी के बीच गठबंधन हुआ था

87 सदस्यों वाली जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पीडीपी के पास 28 सीटें हैं जबकि भारतीय जनता पार्टी को अपने 25 विधायकों के अलावा पीपल्स कांफ्रेंस के दो और एक निर्दलीय विधायक का समर्थन भी हासिल है.

बीबीसी से बातचीत में कौल का कहना था कि संवैधानिक रूप से राज्यपाल के पास यही विकल्प बचता है कि "वह दूसरे बड़े दल को न्योता दे सकते हैं."

बहुमत साबित करने के लिए भाजपा समर्थन कहां से जुटाएगी, इस पर कौल ने कहा, "नंबर हासिल करना बड़ी बात नहीं है. जब सरकार बनाने की नौबत आएगी तो नंबरों का इंतज़ाम भी हो जाएगा."

उन्होंने माना कि भाजपा ने अपने सिद्धांतों से समझौता करते हुए पीडीपी के साथ गठबंधन किया जिससे पार्टी की साख को नुक़सान पहुँचा.

वहीं नेशनल कांफ्रेंस के प्रवक्ता जुनैद मट्टू का कहना था कि अगर पीडीपी पीछे हटती है तो संवैधानिक रूप से राज्यपाल भाजपा को न्योता दे सकते हैं.

हालांकि उन्हें लगता है कि अगर ऐसा हुआ तो यह भाजपा और पीडीपी के बीच गुप्त समझौते के तहत ही होगा.

मेहबूबा मुफ्ती

मट्टू के मुताबिक़, "संवैधानिक रूप से यह भी एक विकल्प है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिसे लोगों ने इतना समर्थन दिया वो किसी काम के नहीं साबित हुए. ऐसे में जम्मू कश्मीर में चुनाव का विकल्प बेहतर होगा."

वहीं राजनीतिक विश्लेषक बशीर मंज़र को भी लगता है कि भारतीय जनता पार्टी जम्मू कश्मीर में इतिहास रच सकती है और पहली बार पार्टी उसका मुख्यमंत्री बन सकता है. बेशक उनके पास विधानसभा में नंबर हों या नहीं.

वह कहते हैं, "ऐसा कर भाजपा उस नुक़सान की भरपाई कर सकती है जो उसे पीडीपी के साथ गठबंधन करके उठाना पड़ा है. वो यह भी कर सकते हैं कि बहुमत साबित करने से पहले वह विधानसभा भंग करने की सिफ़ारिश राज्यपाल से कर सकते हैं और राज्यपाल चुनाव तक भाजपा का कार्यवाहक मुख्यमंत्री नियुक्त कर सकते हैं.''

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