सुप्रीम कोर्ट फिर करेगा समलैंगिकता पर विचार

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सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध मानने के ख़िलाफ़ दायर याचिका को पांच जजों की बड़ी बेंच को सौंप दिया है.

ये याचिका सुप्रीम कोर्ट के 2013 के फ़ैसले के ख़िलाफ़ दायर की गई है, जिसमें समलैंगिक सेक्स को अपराध न मानने के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया गया था.

अब पांच जजों की बेंच को फैसला करना है कि समलैंगिकों के बीच शारीरिक संबंधों को अपराध मानने वाले 19वीं सदी के क़ानून को बरकरार रखा जाए या नहीं.

मौजूदा भारतीय क़ानून के तहत दो पुरूषों के बीच शारीरिक संबंध अपराध की श्रेणी में आते हैं जिसके लिए 10 साल तक की सज़ा हो सकती है.

समलैंगिक अधिकारों के लिए काम करने वाले लोग इस कानून को ख़त्म करने की पैरवी करते हैं.

कई समलैंगिक कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है.

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