दौरा मोदी-आबे का, आफ़त सांडों की

वाराणसी में जानवर

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    • Author, रोशन कुमार जायसवाल
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के वाराणसी दौरे को एक सप्ताह से ज़्यादा समय बीत गया है लेकिन उनके इस आगमन की सज़ा अब भी बेज़ुबान जानवर भुगत रहे हैं.

12 दिसम्बर को आबे के दौरे को देखते हुए वाराणसी नगर निगम ने हफ्तों अभियान चलाकर 60 सांड़ों और दर्जनों गायों को पकड़कर बनारस के भोजूबीर स्थित मवेशीखाना में रखा था.

ज़्यादातर गायों को तो उनके मालिकों ने रिहाई शुल्क देकर छुड़ा लिया लेकिन अभी भी लगभग 10 गायें और 60 सांड़ मवेशीखाना में ही खुले आसमान के नीचे रह रहे हैं.

पहचान जाहिर न करने की शर्त पर नगर निगम के एक कर्मचारी ने बताया कि इन जानवरों को संभालने में काफ़ी दिक्कतें आ रही हैं.

कर्मचारियों के अनुसार गाय-भैंस जैसे जानवरों की रोज़ाना खुराक पर 25 रूपए खर्च होने चाहिए.

वाराणसी में मवेशी

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नगर निगम यह राशि पशुओें के मालिकों से रिहाई के वक़्त वसूलता है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक 25 रूपए के हिसाब से खुराक उपलब्ध नहीं कराई जा रही है.

कुछ कर्मचारियों से मवेशियों की भूख देखी नहीं गई तो उन्होंने आला अधिकारियों से अनुराेध किया जिसके बाद सिर्फ सूखे भूसे का ही इंतजाम हो सका है.

कई सांड़ तो आपस में लड़कर घायल भी हो गए हैं और कई जानवर बीमार भी हो गए हैं. गोमूत्र और गोबर के कारण वहां साफ़-सफ़ाई की स्थिति ख़राब है.

गुस्सैल सांड़ों के बीच जाकर कोई साफ-सफाई की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है.

एक कर्मचारी ने बीबीसी हिंदी को बताया कि सांड़ों को कोई छुड़ाने नहीं आता इसलिए उनकी खुराक पर हुए खर्च को वसूला भी नहीं जा सकता.

यही वजह है कि सांड़ों के खाने के इंतजाम में काफ़ी दिक़्क़त होती है.

वाराणसी में जानवर

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स्थानीय लोगों को भी इससे काफ़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

क्षेत्रीय दुकानदार मनोज ने बताया कि बदबू की वजह से जीना मुहाल हो गया है. ग्राहक दुकान पर आकर वहां खड़ा नहीं होना चाहते हैं.

वहीं बबलू यादव ने बताया कि उनको बचपन से ही ये सब देखने की आदत पड़ चुकी है. गंदगी के चलते पूरे इलाक़े में मच्छर फैल रहे हैं और दिनभर मवेशियों के रेंकने की आवाज आती रहती है.

वाराणसी नगर के आयुक्त एचपी शाही ने बीबीसी हिंदी को बताया कि आवारा मवेशियों को पकड़कर नगर निगम गोशाला में शिफ्ट करता है, लेकिन इस बार देरी की वजह यह है कि पहले वाली गोशाला ने इन मवेशियों को लेने से मना कर दिया है.

हालांकि उनका ये भी कहना था कि एक दूसरी गोशाला में बात हो गई है और एक-दो दिनों के बीच मवेशियों को वहां भेज दिया जाएगा.

उन्होंने कहा कि सांड़ों की बाकायदा एंट्री हुई है और खुराक के बारे में आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें कहा कि नियमित खुराक दी जा रही है.

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