असम राइफल्स के विरोध में नहीं छापे संपादकीय

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इमेज कैप्शन, 'नागालैंड पेज' की संपादक मोनालिज़ा चांगकिजा (दाएं से दूसरी)
    • Author, दिलीप कुमार शर्मा
    • पदनाम, गुवाहाटी से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

नागालैंड से प्रकाशित होने वाले छह अंग्रेजी अख़बारों के संपादकों ने राज्य में आंतरिक सुरक्षा के लिए तैनात असम राइफल्स की दखलंदाजी का विरोध करते हुए एक संयुक्त बयान जारी किया है.

तीन अंग्रेजी अखबारों ने सोमवार को राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर अपने संपादकीय कॉलम को खाली छोड़कर विरोध जताया है.

नगालैंड में सक्रिय अलगाववादी संगठनों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही असम राइफल्स ने 24 अक्तूबर को एक पत्र लिखकर कहा कि अखबारों में हाल में प्रकाशित खबरों में एनएससीएन (खापलांग) की तरफ़ से राज्य सरकार के विधायकों को धमकी देने और उनसे धन वसूली की मांग करने संबंधी ख़बर प्रकाशित की गई.

पत्र के मुताबिक़ इस तरह के लेख एक तरह से अवैध संगठन का समर्थन करने जैसा है और अख़बारों को ऐसे लेख प्रकाशित नहीं करने चाहिए.

ईस्टर्न मिरर, नागालैंड पेज और द मोरंग एक्सप्रेस जैसे तीन स्थानीय अंग्रेजी अख़बारों ने इसके विरोध में अपना संपादकीय खाली छोड़ा.

राज्य में दैनिक समाचार पत्रों की स्थापना के बाद से यह पहला ऐसा मौक़ा है जब अखबारों के कामकाज पर किसी सुरक्षा एजेंसी ने इस तरह के सवाल उठाए है.

नागालैंड

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इमेज कैप्शन, मोरुंग एक्सप्रेस का खाली संपादकीय क़लम

हालांकि असम राइफल्स के कर्नल राजेश गुप्ता ने फोन पर बीबीसी से कहा कि स्थानीय अख़बारों को जो पत्र भेजा गया उसमें मीडिया पर दबाव बनाने जैसी कोई बात नहीं है.

नागालैंड के एक पत्रकार ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि नागालैंड में सभी संगठनों द्वारा धन उगाही का मुद्दा काफी गंभीर है.

इस मुद्दे पर संयुक्त बयान जारी कर चुके संपादक अलग से कोई बात नहीं करना चाहते.

अपने साझा बयान में संपादकों ने कहा है कि वे नागालैंड के इतिहास की पृष्ठभूमि और वर्तमान वास्तविकता को ध्यान में रखकर एक स्वतंत्र, निष्पक्ष, संवेदनशील और निष्पक्ष दृष्टिकोण से यहां रिपोर्टिंग कर रहे हैं.

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