'जेएनयू राष्ट्रविरोधी ताक़तों का अड्डा है'

जेएनयू

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मुखपत्र पांचजन्य में दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी को राष्ट्रविरोधी ताक़तों का अड्डा बताया गया है.

अख़बार की कवर स्टोरी के मुताबिक़ जेएनयू में समय-समय पर राष्ट्रविरोधी गतिविधियां आयोजित की जाती हैं और साल 2010 में जब छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के हाथों 70 से ज़्यादा जवान मारे गए थे तब विश्वविद्यालय में जश्न मनाया गया था.

लेख पर सोशल मीडिया में काफ़ी प्रतिक्रिया हो रही है.

@mishra_pravin के मुताबिक़, "जो भी संघ की विचारधारा से सहमत नहीं है उनके मुताबिक़ वो देशद्रोही हो जाता है."

@raishiv2001 ने लिखा, "आरएसएस ख़ुद ही नफ़रत की राजनीति कर राष्ट्रविरोधी हरकतों में लिप्त रहता है."

आरएसएस

@shivanagpur ने लिखा, "पांचजन्य का घटिया बयान. जेएनयू देश की बेहतरीन यूनिवर्सिटी में से एक है."

वहीं कई लोगों ने पांचजन्य के इस लेख से सहमति भी जताई.

@snaatn लिखते हैं, "सच हमेशा कड़वा होता है. और ये भी एक ऐसा ही सच है."

@bemelmesre ने लिखा, "एक विद्रोही या असंतुष्ट संस्थान होने में कुछ भी ग़लत नहीं है. लेकिन सरकार के पैसों पर आप ऐसा नहीं कर सकते."

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