पुरस्कार लौटाने वालों के हक़ में रुश्दी

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बुकर पुरस्कार विजेता और जाने-माने लेखक सलमान रुश्दी ने भारत में साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने वाले लेखकों का समर्थन किया है.
अपनी किताब 'सेटेनिक वर्सेज़' को लेकर मुस्लिम संगठनों के निशाने पर रहने वाले रुश्दी ने ट्वीट कर कहा, "मैं साहित्य अकादमी से विरोध दर्ज कराने वाली नयनतारा सहगल और अन्य बहुत से लेखकों का समर्थन करता हूं. भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए मुश्किल समय है."

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भारत में हाल के दिनों में कई लेखकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर हुए हमलों के विरोध में सबसे पहले नयनतारा सहगल ने अपना साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाया था.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार अब तक 16 लेखक अपना साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने की घोषणा कर चुके हैं.
इन लेखकों में कश्मीरी लेखक नबी ख़्याल, उर्दू उपन्यासकार रहमान अब्बास, कन्नड़ लेखक श्रीनाथ, हिंदी लेखक मंगलेश डबराल और राजेश जोशी समेत कई बड़े नाम शामिल हैं.
'मूल्यों के प्रति बचनवद्ध'

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समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार साहित्य अकादमी के अध्यक्ष विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने कहा कि संस्थान भारतीय संविधान में संरक्षित धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के प्रति वचनबद्ध है.
कन्नड़ लेखक एमएम कलबुर्गी की हत्या के बाद पिछले दिनों दादरी के बिहासड़ा गांव में गोमांस की अफ़वाह एक व्यक्ति की हत्या के बाद देश में सांप्रदायिकता को लेकर बहस छिड़ी है.
पुरस्कार लौटाने वाले लेखकों ने इन घटनाओं पर प्रधानमंत्री मोदी की 'चुप्पी' पर भी सवाल उठाए.
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