पसंदीदा शिक्षक हटे तो छात्राएं स्कूल से भागीं

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- Author, रवि प्रकाश
- पदनाम, रांची से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम ज़िले में पसंदीदा शिक्षकों को हटाने से नाराज़ एक सरकारी आवासीय स्कूल की 120 स्कूल छोड़कर चली गईं.
ये घटना मझगांव स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की है. स्कूल से भागने वाली ज़्यादातर छात्राएं 10वीं से 12वीं की थीं.
स्कूल प्रबंधन ने छात्राओं के पसंदीदा शिक्षकों को हटाकर नई बहाली कर दी थी जिससे नाराज़ छात्राएं एक अक्तूबर को अपने घर चली गई थीं.
प्रशासनिक अधिकारियों ने इनमें से 115 छात्राओं को दो अक्तूबर की सुबह तक वापस बुला लिया.
पांच लड़कियां अब भी अपने घर पर हैं जिन्हें वापस बुलाने की कोशिश जारी है.
'पसंदीदा टीचर दिला दो'

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आदिवासी बहुल इलाके मझगांव में लड़कियों का यह एक प्रमुख स्कूल है.
स्थानीय पत्रकार और सारंडा टाइम्स के संपादक जीतेंद्र ज्योतिषी ने बताया कि यहां 297 छात्राओं के लिए 4 स्थायी और 8 अस्थायी शिक्षक हैं.
स्कूल में बिजली का कनेक्शन नहीं है इसके कारण डीप बोरिंग के बावजूद पानी का संकट है. स्कूल में आठ शौचालय हैं और छात्राओं का कहना है कि यह उनकी संख्या के हिसाब से कम है.

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स्कूल की वार्डन कैक्टस लिली सिंकू ने बीबीसी को बताया कि बच्चियां अपने पसंदीदा शिक्षकों को वापस बुलाने की मांग कर रही थीं.
ये सभी अस्थायी थे, इनकी नियुक्ति सिर्फ तीन महीने के लिए ही की जाती है. जुलाई में उनका अनुबंध ख़त्म हुआ तो उनकी जगह नए शिक्षकों को रखा गया.
लिली ने बताया कि पहले वाले समूह में पुरुष शिक्षकों की संख्या ज़्यादा थी जबकि, कस्तूरबा विद्यालयों में महिला शिक्षकों को प्राथमिकता देने का प्रावधान है.
लिहाज़ा, नए चयन में इसका ख़्याल रखा गया.
तालमेल अच्छा था

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मझगांव के बीडीओ बलराज कपूर ने बीबीसी को बताया कि छात्राएं सरिता कुमारी नामक शिक्षिका और चार शिक्षकों को वापस बुलाना चाहती थीं.
30 सितंबर की शाम उन्होंने स्कूल जाकर इन बच्चियों को समझाया था कि पुराने शिक्षकों को बतौर ट्यूटर रखा जा सकता है जिस पर छात्राएं राज़ी नहीं हुईं.
बलराज कपूर ने बताया कि इस घटना के बाद पश्चिमी सिंहभूम के डीसी अबू बकर सिद्दीक़ी ने स्कूल प्रबंधन समिति की बैठक बुलाकर शिक्षकों पर फ़ैसला लेने का निर्देश दिया है.

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स्कूल में नौंवी की छात्रा रेवती पिंगुआ ने बताया कि पुराने शिक्षकों के साथ तालमेल अच्छा था.
इस घटना से एक दिन पहले बैठक में अभिभावकों ने स्थायी समाधान की मांग की थी.
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