'जनहित अभियान देश के ख़िलाफ़ कैसे?'

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मद्रास हाईकोर्ट ने पर्यावरण मामलों पर काम करने वाले अंतरराष्ट्रीय संगठन ग्रीनपीस को गृह मंत्रालय के एफ़सीआरए को रद्द किये जाने के आदेश से अंतरिम राहत दे दी है.
न्यायाधीश एम एम सुन्दरेश ने ग्रीनपीस के एफ़सीआरए को रद्द किये जाने के निर्णय पर आठ हफ़्ते तक की रोक लगा दी है.
एफ़सीआरए का मतलब है फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगूलेशन एक्ट, यानी जिसके तहत स्वयंसेवी संस्थाएं विदेशी धन ले सकती हैं और देश में इसे विकास के लिए इस्तेमाक कर सकतीं है. इसके लिए संस्था को सरकार के नियमों का पालन करना पड़ता है.
कोर्ट ने संस्था के वकील को गृह मंत्रालय को नोटिस भेजने का आदेश भी दिया गया है.

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इसी साल सितंबर में गृह मंत्रालय ने संस्था पर विदेशी फंड लेने के नियमों का उल्लंघन करने के लिए विदेशों से फंड हासिल करने का लाइसेंस रद्द कर दिया था.
इस पर ग्रीनपीस ने <link type="page"><caption> आरोप लगाया</caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/india/2015/09/150904_greenpeace_accuse_indian_govt_of_supressing_dissent_dil.shtml" platform="highweb"/></link> था कि भारत सरकार उसकी आवाज़ को दबा रही है.
ग्रीनपीस वापस लेगा केस

ग्रीनपीस ने मद्रास हाईकोर्ट को बताया कि वह दिल्ली हाईकोर्ट में चल रहे अपने अस्थायी एफ़सीआरए निलंबन के केस को वापस ले रहा है.
ग्रीनपीस का कहना है कि गृह मंत्रालय ने संस्था पर राष्ट्र हित के ख़िलाफ़ काम करने का आरोप लगाया है.

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ग्रीनपीस की सह-कार्यकारी निदेशक विनुता गोपाल पूछती हैं, “स्वच्छ पानी, साफ हवा और टिकाऊ बिजली के लिये चलाये जा रहे अभियान को देश के खिलाफ कैसे बताया जा सकता है? हमें एक बेहतर भारत के लिए हमारे मौलिक अधिकारों की रक्षा करने की गुहार लगानी पड़ रही है, ताकि हम जनहित कार्यक्रम जारी रख सकें.”
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