मोदी सिलिकॉन वैली से क्या लाएँगे?

मोदी और ओबामा

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    • Author, सीमा सिरोही
    • पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दूसरी बार अमरीका के दौरे पर जाने की तैयारी में हैं, लेकिन उद्देश्य वही है- भारत के विकास में अमरीकियों को साझीदारी बनाना.

पिछले साल सितंबर में मोदी ने अपना ध्यान भारत और अमरीका के बीच व्यापार के सभी पक्षों पर केंद्रित किया था, लेकिन इस बार उनकी नज़र सिलिकॉन वैली पर है.

सिलिकॉन वैली

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सिलिकॉन वैली मोदी के लिए इसलिए भी ख़ास है कि ये एक देश के अंदर एक ‘दूसरे देश’ की तरह है. यहाँ बड़ी संख्या में भारतीय हैं.

पिछले दो दशकों से भारत के सबसे तेज़ दिमाग़ अपने प्रयोगों को साकार करने के लिए यहाँ आते रहे हैं और कई तो नौकरी करते-करते कारोबारी तक बन गए हैं.

यहाँ लगभग 40 प्रतिशत स्टार्ट अप या तो भारतीयों ने स्थापित किए हैं या उन्होंने इसमें निवेश किया है.

<bold><link type="page"><caption> मिलिए सिलिकॉन वैली के इंडियन शेरों से...</caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/international/2015/01/150123_silicon_valley_nri_indian_sk" platform="highweb"/></link> </bold>

मोदी की नज़र कहाँ

सिलिकॉन वैली

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मोदी अपनी महत्वाकांक्षी योजनाओं- डिजिटल इंडिया, ‘स्टार्ट-अप इंडिया’ और ‘स्टैंड- अप इंडिया’ को साकार करने के लिए इस वर्ग को रिझाने की कोशिश करेंगे.

उनका दौरा उन्हें यह जानने का मौका देगा कि सिलिकॉन वैली को क्या ख़ास बनाता है और इसकी सफलता को कैसे भुना सकते हैं.

वैसे तो मोदी सिलिकॉन वैली में लगभग 26,000 लोगों को संबोधिक करेंगे, लेकिन इस रैली से कहीं अधिक महत्वपूर्ण उनकी वो बैठकें हैं जो वो सिलिकॉन वैली के छोटे और बड़े कारोबारियों के साथ करने वाले हैं.

मोदी का भाषण सुनने के लिए लगभग 45,000 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया है.

आलोचकों का कहना है कि कुल मिलाकर ‘मैडिसन स्क्वॉयर’ जैसे आयोजन बस मोदी के आसपास ही सिमट जाते हैं और इससे भारत को कोई फ़ायदा नहीं होता.

लोगों की भीड़, जोश और उनकी दिलचस्पी से बहुत कुछ हासिल नहीं होता यानी भारत को ख़ास फ़ायदा नहीं होता.

कैलिफ़ोर्निया स्थित निवेशक एमआर रंगास्वामी का कहना है कि मोदी को ‘युवा और छोटे उद्यमियों’ से मिलना चाहिए और उनके अनुभवों के बारे में पूछना चाहिए.

<bold><link type="page"><caption> सिलिकॉन वैली के स्टार्ट अप गुरू</caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/multimedia/2015/01/150123_gi_video_vivek_wadhva_sb" platform="highweb"/></link> </bold>

'भारत नहीं है सिलिकॉन जैसा'

वो सिलिकॉन वैली में जिस तरह से काम कर रहे हैं, वह अद्भुत है.

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रंगास्वामी बताते हैं, “आप कर्ज़ लेकर कंपनी शुरू करते हैं, रियल एस्टेट के लोग आपको मुफ़्त में ज़मीन देते हैं, काग़जी कार्यवाही करने के लिए वकील बहुत कम फ़ीस वसूलते हैं और बदले में कंपनी के शेयर लेते हैं.”

रंगास्वामी कहते हैं, “आपका ये प्रयास विफल भी हो सकता है. ऐसा हो तो आप अपने नुक़सान की घोषणा कीजिए और अपने अगली योजना की तरफ बढ़ जाइए.” मोदी की टीम को इन लोगों के बीच समय गुजारना चाहिए.

सिलिकॉन वैली में दो कंपनियां शुरू करने वाले और अब एक प्रमुख निवेशक बीवी जगदीश की इस पर अपनी राय है. वो कहते हैं कि सरकार का अगला क़दम ऐसा माध्यम बनने का होना चाहिए, ताकि भारत में भी ऐसी ही मानसिकता के लोगों को तैयार करने में मदद की जा सके.

<link type="page"><caption> सिलिकॉन वैली का बॉस्केटबॉल प्रेमी </caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/international/2015/02/150202_sillicon_valley_usa_basketball_rns" platform="highweb"/></link>

'शोध को मिले अहमियत'

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जगदीश कहते हैं, “उद्यमशीलता की भावना भारतीय डीएनए में है.” उन्होंने अपनी पहली कंपनी एक्जोडस कम्युनिकेशंस 10 हज़ार डॉलर में शुरू की थी और आज उसकी मार्केट कैप 3,000 करोड़ डॉलर है.

जगदीश कहते हैं, “आपको भारत में मानसिकता बदलनी होगी. सरकार को शोध को अधिक अहमियत देनी होगी. सिलिकॉन वैली इसीलिए कामयाब है क्योंकि यहाँ अमरीकी सरकार ने शोध पर बहुत अधिक निवेश किया है.”

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भारतीय मूल के अमरीकी मोदी के सिलिकॉन दौरे को लेकर जोश में हैं और उनसे मिलने और उन्हें अपने सुझाव देने को लेकर उत्साहित हैं, लेकिन उनका कहना है कि असल माहौल तो भारत में ही बनाना होगा.

फिर मामला चाहे टैक्स का हो, प्रशासनिक मंज़ूरियों से जुड़ा या बैंकिंग सिस्टम की जटिलताओं का...

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