शिवराज सिंह की छवि चमकाने में जुटी पीआर फर्म

'शिवनीर' का प्याऊ

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    • Author, शुरैह नियाज़ी
    • पदनाम, झाबुआ से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

व्यापमं मामले के उबरने के बाद मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी पर्सनल ब्रांडिग में जुट गए हैं.

मुख्यमंत्री को शायद यह महसूस होने लगा है कि प्रदेश में उनकी छवि अब वैसी नहीं रह गई है, जिसके लिए उन्हें जाना जाता था.

इस वजह से उन्होंने कुछ ऐसे कदम उठाए हैं, जिससे वे अपनी खोई प्रतिष्ठा वापस पा सकें.

प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री की छवि को निखारने का ज़िम्मा मेडिसन इंडिया नाम की एक पीआर फर्म को सौंपा है.

गोपनीय है समझौता

शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश

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मेडिसन इंडिया के चेयरमेन सैम बलसारा का कहना है कि मध्यप्रदेश सरकार के साथ हुआ यह समझौता गोपनीय है और वे उसके बारे में कुछ नहीं बता सकते.

जनसंपर्क आयुक्त अनुपम राजन ने इसकी पुष्टि की है कि मेडिसन इंडिया राज्य सरकार के लिए काम कर रही है.

बीते कुछ दिनों से एफएम रेडियो पर ऐसे विज्ञापन चल रहे हैं, जिनमें शिवराज सिंह चौहान किसानों को सोयाबीन की ख़राब हो रही फ़सल पर सलाह देते सुने जा सकते हैं.

<bold><link type="page"><caption> व्यापमं: सरकार ने बताया ऐसे मरे 34</caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/india/2015/07/150713_vyapam_deaths_list_an.shtml" platform="highweb"/></link></bold>

किसानों के बीच पहुंचने की चाह

आम जनता के बीच शिवराज सिंह चौहान

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माना जा रहा है कि शिवराज सिंह चौहान किसानों के बीच अपनी छवि सुधारने की कोशिश कर रहे हैं. उनकी आवाज़ सुनाने का मक़सद यह है कि इससे किसानों को अपनापन महसूस होगा.

दूसरी ओर, भोपाल में लोगों की प्यास बुझाने के लिए ‘शिवनीर’ आरओ वाटर के प्याऊ खोले जा रहे है.

इनके ज़रिए मुफ़्त पानी बांटने की व्यवस्था की गई है.

यहां अगर आप ज्यादा पानी चाहते हैं तो उसके लिये आप को एक रुपये में एक लीटर पानी मुहैया कराया जा रहा है.

हार नहीं मानने वाले

राजनीतिक जानकार मानते है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान किसी भी सूरत में व्यापमं मुद्दे पर पीछे नहीं हटना चाहते है.

<bold>पढ़ें: <link type="page"><caption> व्हिसलब्लोअर के कुछ डाटा पर संदेह: एसआईटी</caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/india/2015/07/150711_vyapam_sit_chief_investigation_sr.shtml" platform="highweb"/></link></bold>

राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई कहते है, “शिवराज सिंह चौहान व्यापमं मामले में दबने या पीछे हटने वाले नहीं है. वे इस मुद्दे पर आसानी से हार नहीं मानने वाले है. यही वजह है कि वे सारे पैंतरे अपना रहे है ताकि जनता के बीच मज़बूत छवि रखी जा सके.”

कांग्रेस का आरोप है कि मुख्यमंत्री जनता के धन का दुरुपयोग कर अपनी छवि चकमा रहे है.

व्यापमं का दफ़्तर

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कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता केके मिश्र कहते है, “शिवराज सिंह चौहान जनता के पैसे का दुरुपयोग करके अपनी इमेज सुधारने का प्रयास कर रहे है. जिस प्रदेश में 65 प्रतिशत आबादी को स्वच्छ पीने का पानी नहीं मिल रहा है, वहां उनकी इस तरह की नौटंकी कारगर साबित नहीं होगी.”

<bold>पढ़ें: <link type="page"><caption> शिवराज सिंह: यह चुप्पा चौहान नहीं चूकता</caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/india/2013/11/131102_shivraj_singh_profile_pk.shtml" platform="highweb"/></link></bold>

स्वयं हैं ब्रांड

शिवराज सिंह चौहान

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लेकिन भाजपा का दावा है कि शिवराज सिंह स्वयं एक ब्रांड है.

भाजपा प्रवक्ता हितेश वाजपेयी कहते है, “वे बरसों से मुख्यमंत्री हैं. इसलिए वे अपने आप में एक बड़े ब्रांड हैं. जब उनकी साख़ किसी चीज़ से जुड़ती है तो उसकी स्वीकार्यता बढ़ती है."

उनके मुताबिक़, "मुख्यमंत्री का नाम जुड़ने से उस पानी की विश्वसनीता बढ़ जाती है. लोगों को लगता है कि जितने विश्वास योग्य शिवराज सिंह है उतना ही विश्वास इस पानी पर भी किया जा सकता है.”

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