मीट बैन पर भाजपा-शिवसेना में किचकिच

- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
लोकतंत्र में सरकार जब ये फ़ैसले करने लगे कि आप क्या खाएं, क्या पहने और क्या पढ़ें, तो समाज में अशांति फैलने का ख़तरा पैदा होता है.
मोदी सरकार ने पहले अश्लील वेबसाइटों पर बिना किसी बहस के पाबंदी लगाने का फ़ैसला किया, जिसे बाद में वापस लेना पड़ा.
अब महाराष्ट्र की एक महानगर पालिका ने जैन त्योहार के दौरान हर तरह के मांस की बिक्री पर प्रतिबंध का प्रस्ताव पारित किया है.
इसका मतलब ये हुआ कि वहां 10 सितंबर से 17 सितंबर तक मीट की बिक्री नहीं होगी
दिलचस्प बात ये है कि शिवसेना ने इसका विरोध किया है.
'गठबंधन में दरार'
मुंबई से सटे मीरा भयंदर में एक हफ़्ते के लिए मीट की बिक्री पर रोक के फ़ैसले से सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना के बीच दरार पैदा हो गई है.
शिवसेना ने इस फ़ैसले को असंवैधानिक और ग़ैर क़ानूनी बताया है.
मीरा भयंदर की महानगर पालिका में भाजपा-शिवसेना का बहुमत है.

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भाजपा चार सितंबर को पिछले सालों की तरह दो दिनों के लिए मीट की बिक्री पर पाबंदी के बजाय इसे बढ़ा कर आठ दिनों की पाबंदी का प्रस्ताव दो वोटों से पारित कराने में कामयाब हो गई थी.
वोटिंग के समय शिवसेना के चार पार्षद हाज़िर नहीं थे जिनके ख़िलाफ़ 'कारण बताओ' नोटिस जारी किया गया है.
भाजपा-शिवसेना के गठबंधन ने पिछले साल महानगर पालिका का चुनाव जीता था.
शिवसेना के स्थानीय विधायक प्रताप सरनायक ने बीबीसी को बताया कि उनकी पार्टी भाजपा की भागीदार ज़रूर है लेकिन इस फ़ैसले का पार्टी ने कड़ा विरोध किया है.
शिवसेना मानती है कि धर्म के आधार पर खाने पीने पर पाबंदी लगाना ग़लत है.
पार्टी के एक बड़े नेता संजय राउत ने कहा कि इस तरह के फ़ैसले से आगे जाकर समाज में फूट पैदा होगी.
शिवसेना ने ज़िला अधिकारियों से जब शिकायत की, तो प्रशासन ने इस पर क़ानूनी सलाह लेने का फ़ैसला किया.
'मिनी इंडिया'
अभी ये साफ़ नहीं है कि 10 सितंबर से 17 सितंबर तक मीट की बिक्री पर पाबंदी लागू होगी या नहीं. वैसे, संकेत ये हैं कि पाबंदी पर अमल नहीं होगा.
लेकिन पाबंदी लगाने के इस फ़ैसले पर काफी चर्चा हो रही है.
शिवसेना सासंद संजय राउत के अनुसार इस फ़ैसले का विरोध केवल शिवसेना ने नहीं किया है, बल्कि सभी पार्टियों ने किया है.
शिवसेना विधायक प्रताप सरनायक कहते हैं कि मीरा रोड भयंदर में मुस्लिम, मराठी, जैन समुदाय और दक्षिण भारतीयों की मिली जुली आबादी है.

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वो कहते हैं, "ये एक तरह का मिनी इंडिया है."
उनका कहना है कि जैन समाज की तरह मुस्लिम समाज रमज़ान में शराब पर पाबंदी लगाने की मांग कर सकता है. इसका कोई अंत नहीं.
शिवसेना का आरोप है कि भाजपा का ये फ़ैसला जैन समाज में पार्टी की छवि बेहतर बनाने की एक कोशिश है. विधायक कहते हैं, "ये एक सियासी फ़ैसला है".
लेकिन भाजपा के एक प्रवक्ता ने कहा कि शिवसेना इसका विरोध करके इसे सियासी रंग देने में जुटी है.
'बैन-इस्तान' न बन जाए
इंटरनेट और सोशल मीडिया के ज़माने में स्थानीय मुद्दे मिनटों में राष्ट्रीय मुद्दे बन जाते हैं.
मीरा भयंदर नगर पालिका के फ़ैसले पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं.
सोनाक्षी सिन्हा और सोनम कपूर जैसी अभिनेत्रियों ने इसका ट्विटर पर विरोध किया है.
सोनाक्षी ने पिछले एक साल में कई तरह की पाबंदियों की तरफ इशारा करते हुए इस फ़ैसले को 'बैन-इस्तान' कहा.
सच तो ये है कि तालिबान के दौर से सबक सीखने की ज़रूरत है वरना सोनाक्षी की बात सच न साबित हो जाए. कहीं हिन्दुस्तानी समाज 'बैन-इस्तान' न बन जाए
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