'मारिया शायद अपने अधिकार-क्षेत्र से बाहर जा रहे थे'

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शीना वोहरा हत्याकांड की जांच कर रहे मुंबई पुलिस आयुक्त राकेश मारिया को पदोन्नति देकर होमगार्ड का महानिदेशक बनाया गया है.
मीडिया में पहले ख़बर आई कि अब शीना मामले की जांच वो नहीं करेंगे बाद में कहा गया कि मामाले की जांच वही करेंगे. साथ ही मारिया की ललित मोदी से मिलना भी चर्चा का विषय रहा था.
मारिया के तबादले पर पंजाब पुलिस के पूर्व प्रमुख केएस ढिल्लो की राय पढ़िए..

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महाराष्ट्र सरकार की इस बात में दम नहीं है कि गणपति उत्सव को ध्यान में रखते हुए राकेश मारिया को मुंबई पुलिस आयुक्त से पद से हटाकर डीजी (होमगार्ड) बनाया गया है.
बहाने तो बहुत सारे हो जाते हैं. कोई न कोई ऐसी बात ज़रूर है कि मारिया या तो अपने अधिकार-क्षेत्र से बाहर जा रहे थे या ग़लत दिशा में जा रहे थे या उनके ख़िलाफ़ कोई शिक़ायत हुई होगी.
ऐसे मामलो में बाद में तबादला हो जाता है. उनका प्रमोशन होने वाला था और प्रमोशन के बाद भी बहुत सारे लोग वही काम करते रहते हैं जहां वो पहले थे.
<link type="page"><caption> मुंबई पुलिस प्रमुख भी ललित मोदी से मिले थे </caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/india/2015/06/150620_rakesh_maria_explains_meeting_lalit_modi_dil" platform="highweb"/></link>
कुछ दिन पहले ख़बर आई थी कि राकेश मारिया ने लंदन जाकर आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी से मुलाक़ात की थी.
वह भी सही नहीं था, हालांकि राकेश मारिया ने इस मुलाक़ात की कोई वजह तो बताई थीं लेकिन आमतौर पर ऐसा नहीं होता कि आप किसी ऐसे व्यक्ति से मिलो. कोई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ऐसा नहीं करता.
<link type="page"><caption> ललित मोदी के ख़िलाफ ग़ैर ज़मानती वारंट</caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/india/2015/08/150805_lalit_modi_non_bailable_warrant_ac" platform="highweb"/></link>

राकेश मारिया मुंबई पुलिस आयुक्त पद पर रहते हुए हाई प्रोफ़ाइल शीना मर्डर केस की जाँच की देखरेख ख़ुद कर रहे थे.
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यह बहुत पुराना सिद्धांत है कि सबसे वरिष्ठ अधिकारी कभी खुद पूछताछ या जांच-पड़ताल नहीं करते, यह उनका काम होता भी नहीं है.
मुंबई पुलिस आयुक्त का पद तो वैसे भी बहुत व्यस्त पद है. उन्हें और भी बहुत काम होते हैं.
ऐसे में ख़ुद जांच करने के बजाए वो अपने अधिकारियों का मार्गदर्शन कर सकते हैं.
ये नहीं पता कि इसकी असल वजह क्या है लेकिन यह उनका काम नहीं था.
(पंजाब पुलिस के पूर्व प्रमुख केएस ढिल्लो से बीबीसी संवाददाता निखिल रंजन की बातचीत पर आधारित)
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