वन रैंक वन पेंशन: फ़ैसले की 7 ख़ास बातें

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भारत सरकार ने पूर्व सैनिकों के लिए शनिवार को वन रैंक वन पेंशन का ऐलान कर दिया. हालांकि पूर्व सैनिकों का कहना है कि उनकी सभी मांगे नहीं मानी गई हैं और वो प्रदर्शन जारी रखेंगे.
इसके तहत समान रैंक पर रिटायर हुए सभी सैनिकों और सैन्य अधिकारियों को समान पेंशन मिलेगी.
उदाहरण के तौर पर 1996 में रिटायर हुए सैन्य अधिकारी को 2006 में उसी रैंक पर रिटायर हुए अधिकारी के बराबर पेंशन मिलेगी.
सरकार के फ़ैसले की मुख्य बातें
- 1. ओआरओपी का फ़ायदा एक जुलाई 2014 से लागू किया जाएगा. ओआरओपी साल 2013 के आधार पर निर्धारित की जाएगी.
- 2. रक्षा मंत्री के मुताबिक वन रैंक वन पेंशन यानी ओआरओपी लागू करने से 8000-10,000 करोड़ रुपए ख़र्च होंगे. ये ख़र्च भविष्य में और भी बढ़ेगा.
- 3. पेंशन हर पाँच साल में निर्धारित की जाएगी. <image id="d5e358"/>
- 4. जो सैनिक स्वेच्छा से रिटायरमेंट (वीआरएस) लेते हैं उन्हें ओआरओपी नहीं मिलेगा. इसमें युद्ध में घायल होने के कारण रिटायर होने वाले सैनिक शामिल नहीं.
- 5. बढ़ी हुई पेंशन चार अर्धवार्षिक किस्तों में अदा की जाएगी. सैनिकों की विधवाओं को बढ़ी हुई पेंशन एक किस्त में ही दी जाएगी.
- 6. सरकार के मुताबिक सिर्फ़ एरियर देने पर ही 10-12 हज़ार करोड़ ख़र्च होंगे.
- 7. रिटायर होने वाले कर्मचारियों के हितों का ध्यान रखने के लिए एक सदस्य न्यायिक आयोग गठित किया जाएगा.

सरकारी टीवी चैनल दूरदर्शन के मुताबिक ओआरओपी लागू होने से क़रीब 25 लाख पूर्व सैनिकों और सैनिकों की छह लाख विधवाओं को फ़ायदा होगा.
हालांकि दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे पूर्व सैनिकों ने सरकार के फ़ैसले से कई अनसुलझे मुद्दों पर प्रदर्शन जारी रखा है.
स्वेच्छा से रिटायरमेंट समेत कई मुद्दों पर अभी भी गतिरोध बरक़रार है.
लेकिन रविवार को प्रधानमंत्री ने हरयाणा के फ़रीदाबाद में दिए एक भाषण में कहा कि वन रैंक वन पेंशन लागू करने में वीआरएस कोई मुद्दा नहीं है, पेंशन सभी को मिलेगी.
इससे पहले पूर्व सैनिकों के नेता मेजर जनरल (रिटायर) सतबीर सिंह का कहना है, "सरकार ने एक ही मांग मानी है और छह मांगे नकार दी हैं. प्रदर्शन जारी रखने के सिवा और कोई विकल्प नहीं है."
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