1965: वो हमला जिसमें भारत के 10 विमान नष्ट हुए

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- Author, रेहान फ़ज़ल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
दिन छह सितंबर, 1965, समय दोपहर 4 बजे, स्थान पाकिस्तान का पेशावर एयरबेस.
स्क्वार्डन लीडर सज्जाद 'नोज़ी' हैदर पठानकोट पर हवाई हमला करने के लिए अपने साथी पायलटों को ब्रीफ़ कर रहे थे. अचानक उन्होंने एक बाल्टी में ताज़ा पानी मंगाया और अपने ओवर ऑल से नंबर 4711 कोलोन की बोतल निकाल कर उसमें उड़ेल दी.
MAP404651171965 का युद्ध: पाकिस्तानी ट्रेन पर हमला 1965 का युद्ध: वायुसेना की भूमिका अहम थीजब भारतीय वायुसेना ने टैंक और हथियार ले जा रही पाकिस्तानी ट्रेन को निशाना बनाया.2015-09-13T19:11:34+05:302015-09-15T22:14:51+05:302015-09-15T22:14:51+05:302015-09-15T22:14:51+05:30PUBLISHEDhitopcat2
फिर उन्होंने छोटे छोटे तौलिए मंगवाए और उन्हें सुगंधित पानी में डुबो कर साथी पायलटों को पकड़ा दिया. सज्जाद हैदर ने बीबीसी को बताया, "मैंने उनसे कहा "हो सकता है ये आपका एकतरफ़ा मिशन हो और आप लौट कर वापस ही न आएं. मैं चाहता हूँ जब आप अपने बनाने वाले से मिले तो आपके अंदर से अच्छी ख़ुशबू आनी चाहिए."
ठीक साढ़े चार बजे 8 सेबर जेटों ने पेशावर से टेक ऑफ़ किया. वो 11000 फ़ीट की ऊंचाई तक गए और फिर नीचे डाइव लगा कर पेड़ों की ऊँचाई पर उड़ने लगे.
चेतावनी को अनदेखा
उधर पठानकोट एयर बेस पर अमृतसर एयर बेस से स्कवार्डन लीडर दंडापानी का एक अर्जेंट टेलिफ़ोन कॉल आया.
उन्होंने विंग कमांडर कुरियन को बताया कि कुछ सेबर जेटों को टेक ऑफ़ करने के बाद रडार के पर्दे से ग़ायब होते हुए देखा गया है.

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ये आने वाले हमले के संकेत हैं. कुरियन ने स्टेशन कमांडर ग्रुप कैप्टेन रोशन सूरी को इस आशंका के बारे में बताया और उनसे कैप यानि कॉम्बैट एयर पेट्रोल की अनुमति मांगी.
सूरी से यहाँ एक बड़ी ग़लती हुई. उन्होंने कैप की अनुमति नहीं दी.
मिग 21 आग की लपटों में
ठीक 5 बज कर 5 मिनट पर पाकिस्तानी सेबर पठानकोट के ऊपर पहुंचे. ऊपर से उन्होंने देखा कि एयरबेस पर बहुत बड़ी संख्या में भारतीय युद्धक विमान पार्क हैं.
नोज़ी हैदर ने 500 मीटर की ऊंचाई से बहुत संभल कर डाइव लगाई और नीचे खड़े विमान पर निशाना लगा कर फ़िक्स्ड गन से हमला किया.
फिर उन्हें नए नए आए दो मिग 21 दिखाई दिए. उस समय उनमें ईंधन भरा जा रहा था. उन्होंने उन पर निशाना लगा कर हमला किया और वो दोनों विमान आग की लपटों से घिर गए.
जहाज़ से नीचे कूदे

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बाक़ी के पायलटों ने भी डाइव लगा कर हमला किया. उन्हें सिर्फ़ दो बार हमला करने के आदेश मिले थे लेकिन कई विमानों को एक साथ देख उनके मुंह में पानी आ गया और उन्होंने हवाई ठिकाने पर कई हमले किए. उनका विरोध करने के लिए एक भी भारतीय विमान ऊपर नहीं आया.
सबसे ऊपर कवर दे रहे विंग कमांडर तवाब ने नीचे कम से कम 14 आग के गोले फैलते हुए देखे. विंग कमांडर कुरियन अपने घर से सटे गैरेज में अपनी गाड़ी पार्क कर रहे थे कि उन्हें विमानभेदी तोपों के गरजने की आवाज़ सुनाई दी.
उन्होंने एयरबेस की तरफ़ नज़र दौड़ाई तो देखा चार सेबर नीचे उड़ते हुए मशीन गन से गोलियाँ बरसा रहे हैं और दो एफ़ 104 स्टारफ़ाइटर ऊपर से उन्हें कवर दे रहे हैं.
जैसे ही चार सेबर वहाँ से हटे दूसरे चार सेबरों ने उनकी जगह ले ली. लगभग उसी समय जनक कपूर अपने नैट को ब्लास्ट पेन के अंदर ले जा रहे थे. एक जूनियर अफ़सर ने चिल्ला कर कहा, "सर ऊपर देखिए. वो हमला कर रहे हैं."

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इस बीच एक सेबर ने मर्देश्वर के नैट को भी ब्लास्ट पेन में घुसते हुए देखा. उसने उस पर गोलियों की बौछार कर दी. मर्देश्वर जहाज़ से नीचे कूद कर भागे और तभी उन्होंने देखा कि उनका नैट आग में धू धू कर जल रहा है.
कॉकपिट से छलांग
उधर 3 स्कवार्डन के फ़्लाइट लेफ़्टिनेंट तिरलोचन सिंह अपना मिसटियर्स जहाज़ ब्लास्ट पेन में पार्क कर नीचे उतर ही रहे थे कि एक सेबर ने उनके विमान पर हमला किया. उन्होंने दौड़ कर एक बंकर में शरण ली.

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उनके नंबर 2 फ़्लाइंग ऑफ़ीसर रसेल मौंटेस अभी भी विमान के अंदर थे और उन्होंने अपनी सीट बेल्ट भी नहीं खोली थी. नीचे एयरमैन उनके जहाज़ के पहिए के नीचे क्लाक लगा ही रहे थे कि गोलियों का एक बर्स्ट उनकी तरफ़ आया.
एयरमैन ने रसेल की तरफ़ शिकायत भरी नज़र से देखा. उन्हें लगा कि रसेल ने ही ग़लती से पेन के अंदर गोलियाँ चला दी हैं. बड़ी मुश्किल से रसेल ने अपनी सीट बेल्ट का स्ट्रैप खोला. वो जब विमान से नीचे उतरने को हुए तो उन्होंने पाया कि एयरमेन ने उनके विमान में सीढ़ी ही नहीं लगाई है. उन्होंने अपनी जान बचाने के लिए कॉकपिट से ही छह फ़ीट नीचे छलांग लगाई.
गड्ढ़े में छह पायलट
उस समय पठानकोट बेस का सिर्फ़ एक मिसटियर्स विमान हवा में था. उसे उड़ा रहे थे युवा फ़्लाइग ऑफ़िसर माइक मैकमोहन. उन्होंने कुछ दिन पहले ही वायु सेना ज्वाएन की थी और वो एक अभ्यास मिशन पर थे. उन्हें रेडियो ट्रैफ़िक ने निर्देश दिया कि वो पठानकोट से दूर रहें और पाकिस्तानी हमला गुज़र जाने के बाद उतरें.
पाकिस्तानी मैकमोहन को नहीं देख पाए. वो बाल बाल बचे और बाद में भारतीय वायु सेना के एयर मार्शल बने.

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उस समय पठानकोट में तैनात एयर मार्शल राघवेंद्रन सुब्रमण्यम अपनी आत्मकथा पैंथर रेड वन में लिखते हैं, "हम क़रीब छह सात पायलट एक गड्ढ़े में एक के ऊपर एक लेटे हुए थे. सबसे नीचे वाला पायलट चिल्लाया मेरा बोझ से दम घुटा जा रहा है. सबसे ऊपर वाले पायलट ने जिसका पिछवाड़ा गड्ढ़े के ऊपर दिखाई दे रहा था, जवाब दिया, मुझसे अपनी जगह बदलोगे?"
सुब्रमण्यम आगे लिखते हैं कि अगर हमने अपने चार नैट हवा में भेज दिए होते तो पाकिस्तानी इतना नुक़सान नहीं कर पाते. उसी दिन पाकिस्तानी विमानों ने हलवारा और आदमपुर पर भी हमला किया. लेकिन वहां भारतीय विमान उनका मुक़ाबला करने के लिए पहले से तैयार थे. पाकिस्तान विमान इन दोनों एयरबेसों के ऊपर तक से भी नहीं गुज़र पाए.
सबको सितार-ए-जुर्रत
सारे सेबर हमला कर सुरक्षित निकल गए. इस हमले में भारत के दस विमान ज़मीन पर ही नष्ट कर दिए गए.
इस हमले में शामिल हर एक पाकिस्तानी पायलट को सितार-ए-जुर्रत दिया गया.

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उन आठ पाकिस्तानी पायलट में से मशहूर गायक अदनान समी के पिता फ़्लाइंग ऑफ़ीसर अरशद समी भी शामिल थे.
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