ओडिशा: 9 दिनों में 48 बच्चों की मौत

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- Author, संदीप साहू
- पदनाम, भुवनेश्वर से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
पूर्वी राज्य ओडिशा के कटक स्थित अस्पताल वल्लभ भाई पटेल पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट आॅफ़ पीडियाट्रिक्स में बच्चों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है.
शिशु भवन नाम से मशहूर इस अस्पताल में पिछले नौ दिनों में अब तक 48 बच्चों की मौत हो चुकी है.
नयागढ़ ज़िले के रहने वाले विजय सेठी भी शिशु भवन अपनी तीन महीने की पोती का इलाज कराने आए थे. लेकिन शनिवार को उनकी पोती की मौत हो गई.
सेठी ने पिछले आठ दिनों में अपनी पोती को बचाने की कोशिश में क़रीब 60 हज़ार रुपये ख़र्च कर दिए थे.
मज़दूरी कर अपने परिवार को चलाने वाले सेठी के अनुसार सही उपचार नहीं मिलने और लापरवाही की वजह से उनकी पोती की मौत हुई है.
वो कहते हैं, ''इलाज में लापरवाही तो हुई है. अगर सर्जन मरीज़ को देखने ही नहीं आएंगे तो फिर मरीज़ को यहां लाने का क्या फ़ायदा.''
उनका कहना है, ''मैं 7-8 दिन से यहीं था, इस बीच कोई भी डॉक्टर मेरी पोती को देखने नहीं आया.''
''आख़िरी वक़्त पर आते हैं मरीज़''

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मरीज़ों से इतर अस्पताल का कुछ और ही मानना है. अस्पताल के अधीक्षक डॉ.निरंजन महंती कहते हैं, ''हमने देखा कि जो भी मरीज़ यहां लाए जाते हैं वो आख़िरी वक़्त में लाए जाते हैं.''
उनके अनुसार, ''मरीज़ को भर्ती करने के 24 घंटे के भीतर 50 प्रतिशत से ज़्यादा मरीज़ों की मौत हो जा रही है. ऐसे में हमारे लिए उन्हें बचाना बहुत मुश्किल हो जाता है.''
महंती के अनुसार अन्य अस्पताल जो इतने सारे आईसीयू संभालते हैं उनके यहां भी इतनी ही मौतें होती हैं. वो कहते हैं, ''ये राष्ट्रीय आंकड़ों के बराबर है. यह बहुत बड़ा आंकड़ा नहीं है.''
कुछ मदद भी मिली
हालांकि मीडिया में आई ख़बरों के बाद मरीज़ों को कुछ राहत भी मिली है.
झारखंड से इलाज करवाने आए सचिन कुमार कहते हैं, ''पहले 22 दिन तक दवाई ख़रीदनी पड़ी. लेकिन जब पैसे ख़त्म हो गए तो मैं कलेक्टर के पास गया और उनसे कहा कि पैसे नहीं बचे हैं, जिन्होंने मेरी मदद की.''
वो कहते हैं, ''कलेक्टर साहब ने मुझे 500 रुपये दिए और जल्दी ही दवाई और बेड का इंतज़ाम करवाने का भरोसा जताया है.''
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