राज्यसभा अड़ंगा लगाने वाला सदन बन गया है?

इमेज स्रोत, PTI
- Author, प्रदीप सिंह
- पदनाम, राजनीतिक विश्लेषक, बीबीसी हिंदी के लिए
वित्त मंत्री और राज्यसभा में सदन के नेता अरुण जेटली ने हाल ही में राज्यसभा की भूमिका पर सवाल उठाए.
उनके मुताबिक़, इस पर बहस होनी चाहिए कि संसद का ऊपरी सदन क्या सीधे चुने हुए निचले सदन से पारित विधेयकों को रोक सकता है?
भारत का संसदीय लोकतंत्र इस समय जिस समस्या से जूझ रहा है, दो सदनों वाले सभी लोकतांत्रिक देशों को इस दौर से गुजरना पड़ा है.
अमरीकी सीनेट से फ़र्क

इमेज स्रोत, AP
अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा भी वह समस्या झेल रहे हैं, जिससे नरेंद्र मोदी की सरकार रूबरू है.
पर, दोनों देशों की समस्या में एक बुनियादी फर्क़ भी है.
अमरीकी सीनेट राष्ट्रपति बराक ओबामा के ईरान परमाणु समझौते के प्रस्ताव के ख़िलाफ़ वोट देती है. पर वहां इससे पहले लंबी और तीखी बहस होती है.
वहां सीनेट में विपक्ष का मक़सद राष्ट्रपति और उनकी पार्टी को अपने तर्कों और मतों से हराना होता है.
हल का तरीका

इमेज स्रोत, PTI
भारत में विपक्ष का मक़सद सरकार को हराना नहीं, उसे रोकना है. यहां बहस नहीं होती.
हमारे संविधान निर्माताओं ने पक्ष और विपक्ष में गतिरोध होने पर उसका हल निकालने की व्यवस्था भी की है. लेकिन संविधान संशोधन विधेयक के मामले में भारत के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है.
पिछले दो दशकों से भारत के संसदीय लोकतंत्र की यह बीमारी लगातार बढ़ती जा रही है. बस किरदार बदल जाते हैं.
संसदीय गतिरोध और विधायी कार्य के बीच का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया है.
लोकसभा में दो तिहाई बहुमत लेकर भी सरकार कोई विधायी काम नहीं करवा पाई. इसकी वजह यह है कि राज्यसभा में बहुमत विपक्ष के पास है.

इमेज स्रोत, AP
समस्या अल्पमत या बहुमत तक सीमित नहीं है. उससे बड़ी समस्या संवादहीनता की है.
सरकार और विपक्ष के बीच बातचीत की आखिरी कड़ी अटल बिहारी वाजपेयी थे.
साल 2004 से साल 2009 तक लोकसभा में लाल कृष्ण आडवाणी और राज्यसभा में जसवंत सिंह विपक्ष के नेता थे.
दुश्मनी में तब्दील विरोध

इमेज स्रोत, AP
लेकिन उस समय के सत्तााधारी दल कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी से उनकी सीधी बातचीत नहीं होती थी.
यही स्थिति 2009 से 2014 के बीच सुषमा स्वराज और अरुण जेटली के साथ रही.
लेकिन, नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद राजनीतिक विरोध दुश्मनी का रूप ले चुका है.
इस पृष्ठभूमि में अरुण जेटली की बात को कांग्रेस से उनकी महज नाराज़गी मानकर नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता.
संसदीय गतिरोध के मौजूदा रूप की वजह से राज्यसभा की भूमिका और उसका महत्व धीरे धीरे कम होता जाएगा.
बातचीत ज़रूरी

इमेज स्रोत, AFP
हालात में जल्दी कोई सुधार न हुआ तो देश में संसदीय लोकतंत्र के ढांचे में बदलाव को रोकना कठिन हो जाएगा.
राजनीतिक दल भविष्य की नहीं सोच रहे हैं. अरुण जेटली जिस ओर इशारा कर रहे हैं, वह कम से कम मौजूदा सदन में तो मुमकिन नहीं ही है.
वे ब्रिटेन की संसद में सुधार संबंधी विधायी कार्यों के बारे में परंपरा का उल्लेख कर रहे हैं.
उनका मक़सद दो ही स्थितियों में पूरा हो सकता है. एक यह कि इसके पक्ष में आम सहमति बने.
इसकी पहली शर्त है, बातचीत. भाजपा कांग्रेस में बातचीत के बिना किसी तरह की आम सहमति नामुमकिन है.
दूसरी शर्त यह है कि सत्ताधारी दल के पास संसद के दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत हो. ये दोनों स्थितियां फिलहाल संभव नहीं लगतीं.
जवाबदेह सत्ता, जिम्मेदार विपक्ष

इमेज स्रोत, EPA
सवाल है कि फिर इसका हल क्या है? संसदीय गतिरोध की वर्तमान समस्या एकदम से खत्म हो जाएगी, यह सोचना भी नासमझी होगी.
इसलिए फ़िलहाल इसे ख़त्म करने की दिशा में सोचने की बजाय इसे कम करने का उपाय खोजना चाहिए.
इससे दोनों पक्षों का काम बन सकता है. देश को इस समय जवाबदेह सत्ता पक्ष और ज़िम्मेदार विपक्ष की ज़रूरत है.
ज़रूरत इस बात की है कि राजनेता देश हित में अपने दलगत हितों की हमेशा नहीं, तो कभी कभी ही सही, कुर्बानी दे सकें.
इसके कोई संकेत तो नजर नहीं आ रहे. हो सकता है बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे इस ताले की कुंजी बनें.
चुनाव में एक पक्ष की जीत तय है. अब यह इस बात पर निर्भर करेगा कि जीतने वाला कितना बड़प्पन दिखाता है और हारने वाला हक़ीक़त को स्वीकार करने को कितना तैयार होता है.
(ये लेखक के निजी विचार हैं)
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>












