मर्दों को टक्कर देतीं कश्मीरी महिलाएँ

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- Author, माजिद जहांगीर
- पदनाम, श्रीनगर से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
गज़ाला, आरिफ़ा और ताबिश कश्मीर की वो औरतें हैं जिन्होंने कश्मीर में मर्दों को चुनौती देने की ठानी है.
कैसे? देश की दूसरी जगहों की तरह यहां भी ज़्यादातर क्षेत्रों में पुरूषों का बोलबाला है और ख़ासतौर पर कारोबार में.
पर अब कुछ बरसों से कारोबार की दुनिया में औरतों ने अपनी पैठ जमानी शुरू की है.
ये कुछ औरतें इस फेहरिस्त में शामिल हैं.
पढ़ें, विस्तार से

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श्रीनगर की 45 साल की गज़ाला अमीन का एक डॉक्टर से एक ‘बिजनेस वुमन’ का सफर दिलचस्प रहा है. सात साल पहले कुछ दिनों के डॉक्टरी पेशे के बाद गज़ाला ने अपना कारोबार शुरू किया.
गज़ाला पहली कश्मीरी महिला हैं जिन्होंने कश्मीर चैम्बर्स ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के चुनाव में हिस्सा लिया और चुनाव भी जीतीं. राज्य सरकार ने गज़ाला को ‘स्टेट अवॉर्ड’ भी दिया है जो पहली बार कश्मीर में किसी महिला को मिला है.
गज़ाला की कंपनी में सुगंधित तेल, सुगंधित पानी और फूलों का पानी तैयार किया जाता है.
गज़ाला नहीं मानतीं कि एक महिला होने के नाते उन्हें कश्मीर में उद्योग जमाने में बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा.
गज़ाला कहती हैं, "कश्मीर में पहली बार ऐसा नहीं हो रहा है कि कोई महिला कंपनी चला रही है. कश्मीर में महिलाएं हमेशा से ही कारोबार के क्षेत्र में रही हैं.”
गज़ाला कहती हैं कि यहाँ तो महिलाएं बाज़ार में मछली बेचती हैं, तो क्या ये कारोबार नहीं है?
उनका कहना है कि ये सोच गलत है कि कश्मीर में महिलाएं मर्दों की बराबरी नहीं कर सकती.
गज़ाला कहती हैं, “अफ़सोस है कि चैंबर्स ऑफ़ कॉमर्स ने आज तक यहाँ कारोबार से जुड़ी महिलाओं के आंकड़े जमा ही नहीं किए.”
'लोग ताना देते हैं'

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28 साल की आरिफ़ा जान ने तीन साल पहले हाथों से बनी चीजों का कारोबार शुरू किया.
एक सरकारी कर्मचारी की बेटी आरिफ़ा ‘इनक्रेडिबल कश्मीरी क्राफ़्ट’ नाम से श्रीनगर में अपनी यूनिट चला रही हैं.
हालाँकि गज़ाला की तरह आरिफ़ा नहीं मानतीं कि कश्मीर में एक महिला के लिए कारोबार करना कोई आसान बात है.
आरिफ़ा कहती हैं, "महिला होने के कारण आपको कई तरह की बातें सुननी पड़ती हैं. कारोबार के सिलसिले में जब एक महिला कश्मीर से बाहर जाती है तो लोग परिवारवालों को ताना देते हैं.”
सफलता को सलाम
ताबिश हबीब की उम्र 25 साल है और उन्होंने पिछले साल ही अपनी कंपनी शुरू की है जहाँ मल्टीमीडिया, ग्राफ़िक्स और प्रिंटिंग सर्विस का काम होता है.

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ताबिश शिद्दत के साथ महसूस करती हैं कि कश्मीर में महिला के लिए कारोबारी दुनिया में क़दम रखना कांटों पर चलने के समान है.
ताबिश कहती हैं, "कश्मीर में इस सोच को क़बूल करवाना बहुत मुश्किल है कि एक महिला भी कारोबार कर सकती है. ऐसा भी नहीं है कि समाज आपको कभी कबूल करने के लिए तैयार नहीं होगा. अगर आप सफल होंगी तो सब ठीक हो जाता है."
ताबिश को इस बात का यक़ीन है कि महिलाएं मर्दों से बेहतर कर सकती हैं.
ये औरतें कश्मीर की बदलती तस्वीर का अक्स भर हैं. कश्मीर चैंबर्स ऑफ़ कामर्स एंड इंडस्ट्री में अभी तक केवल तीन महिला व्यापारी ही क्यों रजिस्टर्ड हैं?
इसका जवाब संगठन कुछ इस तरह देता है, “कश्मीर में उग्रवाद के कारण कारोबार में महिलाओं की भूमिका सीमित रही है, लेकिन अब सूरत बदलने में देर नहीं लगेगी.”
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