दिल्ली मेट्रो चलाएगी बिना ड्राइवर वाली ट्रेन

दिल्ली ऑटोमैटेड मेट्रो

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    • Author, रवि शंकर कुमार
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

दिल्ली मेट्रो ने अपने विस्तार के तीसरे चरण में चालक रहित मेट्रो ट्रेन चलाने का फैसला किया है, जिस पर तकरीबन 40 हज़ार करोड़ रुपए का ख़र्च आएगा.

डीएमआरसी के प्रवक्ता अनुज दयाल ने बीबीसी को बताया, "पूरी तरह ऑटोमैटिक मेट्रो ट्रेन की शुरुआत 2016 के अंत तक हो जाएगी."

उन्होंने बताया कि यह मेट्रो ट्रेन मजलिस पार्क से शिव विहार तक लाइन-7 पर 58 किलोमीटर और जनकपुरी से पश्चिम-बाटनिकल गार्डन तक लाइन-8 पर 38 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करेगी.

हालांकि स्वचालित ट्रेनों की कामयाबी पर मेट्रो में सफर करने वाले कई लोगों को संदेह है तो कई लोग इस नई तकनीक को लेकर रोमांचित हैं.

पूरी तरह से स्वचालित

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डीएमआरसी प्रवक्ता के मुताबिक़ पूरी तरह स्वचालित इस मेट्रो ट्रेन की रफ़्तार 80 किलोमीटर प्रति घंटे होगी. जैसे ही यह ट्रेन इससे अधिक रफ़्तार पकड़ेगी उसमें अपने आप ब्रेक लग जाएगा.

अनुज दयाल ने बताया कि इन ट्रेनों में ड्राइवर कैबिन की ज़रूरत नहीं होगी, जिससे इनमें 40 अधिक यात्री सफ़र कर सकेंगे.

हर ट्रेन में छह कोच होंगे, जिसके एक कोच में 380 यात्री सफ़र कर सकेंगे.

उनके मुताबिक़ इस योजना के लिए दक्षिण कोरिया से 20 पूर्ण स्वचालित मेट्रो ट्रेनें मंगाई गई हैं.

आने वाले समय में 61 अन्य ट्रेनों का निर्माण भारत में बैंगलुरु स्थित 'अर्थ मुवर्स लिमिटेड' कारखाने में होगा, जहाँ 366 से ज्यादा कोचों का निर्माण किया जाएगा.

बिजली की कम खपत

ऑटोमेटेड मेट्रो ट्रेन, दिल्ली

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इस नई मेट्रो ट्रेन में कई तकनीकी सुधार किए गए हैं जिससे बिजली की खपत को 33 फ़़ीसदी तक कम होगी.

पर्यावरण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इसमें फाइबर री-एन्फॉर्स्ट प्लास्टिक शीट का इस्तेमाल किया गया है.

सभी कोच में 230 वोल्ट एसी चार्जिंग सॉकेट और यूएसबी स्लाट, एलईडी स्क्रीन जैसी कई आधुनिक सुविधाएं होंगी.

इस ट्रेन का संचालन व नियंत्रण पूरी तरह से संचार आधारित रेडियो तरंगों के माध्यम से होगा. यह पूरी प्रक्रिया मूविंग ब्लॉक सिस्टम पर आधारित है.

90 सेकेंड से पहले सिग्नल

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अनुज दयाल के मुताबिक़ मूविंग ब्लॉक सिस्टम में किसी भी स्टेशन से ट्रेन छूटने के 90 सेकेंड से पहले ही ट्रेन को अगले स्टेशन के लिए सिग्नल उपलब्ध हो जाएगा.

सामान्य मेट्रो ट्रेन में यही काम ट्रैक के ज़रिए होता है और इसमें ड्राइवर की भूमिका सिग्नल को देखना और दरवाजों को खोलना और बंद करने की होती है.

विश्व के चुनिंदा शहरों की मेट्रो में इस सिग्नल प्रणाली का प्रयोग किया जा रहा है. अभी तक इस प्रणाली के काफी सकारात्मक परिणाम मिले हैं.

अनुज दयाल मानते हैं कि आपदा प्रबंधन की दृष्टि से भी पूर्ण स्वाचालित मेट्रो विश्व स्तरीय है

उन्होंने बीबीसी को बताया, "मेट्रो परिवहन की सभी व्यवस्थाएँ नेशनल फॉयर प्रिवेंशन एसोसिएशन (एनएफपीए) के आदर्श पैमानों को ध्यान में रख कर की गई है. आपदा प्रबंधन में यह दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित संस्था है."

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इस नई प्रणाली से ट्रेन ड्राइवर की भूमिका ख़त्म हो जाएगी. हालांकि शुरू में इन ट्रेनों में भी ड्राइवर मौजूद रहेंगे ताकि किसी आपात स्थिति का सामना किया जा सके. बाद में चरणबद्ध रूप से ट्रेनों को ड्राइवर रहित बना दिया जाएगा.

क्या कहते हैं मेट्रो के मुसाफ़िर

रोज़ नांगलोई से कनॉट प्लेस तक का सफ़र तय करने वाले जमुना प्रसाद समय बचाने के लिए मेट्रो का प्रयोग करते हैं.

पूर्ण स्वचालित मेट्रो ट्रेन के उपयोग पर उनका कहना है कि भारत में इसकी सफलता को लेकर भय है क्योंकि यहाँ तकनीक को लेकर लोग बहुत जागरूक नहीं हैं.

रंगकर्मी वंदना दत्ता को पूर्व स्वाचलित मेट्रो ट्रेन की सुरक्षा पर भरोसा नहीं है. वंदना अक्सर काम के लिए लक्ष्मी नगर से नोएडा जाती हैं.

वो कहती हैं, "दिल्ली में मेट्रो में तकनीकी ख़राबी की कई घटनाएँ हुई हैं. आम लोग तो दरवाज़ा तोड़ कर बाहर निकले हैं. इसलिए मुझे इनकी सुरक्षा पर भरोसा नहीं है."

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कारोबारी मनु शर्मा के मन में पूर्ण स्वाचालित मेट्रो ट्रेन के रख-रखाब को लेकर कई सवाल हैं.

शर्मा कहते हैं कि जैसे ही दिल्ली में मौसम ख़राब होता है, मेट्रो का परिचालन रोक दिया जाता है.

वो कहते हैं, "जल-जमाव के पास बिजली की तारों से चिंगारी निकलती रहती है. आप कई जगहों पर इसको देख सकते हैं."

वहीं पेशे से टीचर बलजीत सिंह कहते हैं कि इस नई तकनीकी का स्वागत करना चाहिए, वरना कोई भी नई चीजें यहाँ नहीं आएगी.

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