1.86 करोड़ सदस्य बनाए, अब खोजें कैसे?

भारतीय जनता पार्टी कार्यालय
    • Author, अतुल चंद्रा
    • पदनाम, लखनऊ से, बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए

उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने मोबाइल फ़ोन पर मिस्ड कॉल के ज़रिये 1.86 करोड़ नए सदस्य तो बना लिए, लेकिन अब ऐसे हज़ारों सदस्यों को ढूंढना मुश्किल हो रहा है.

कारण यह कि कई सदस्यों का पूरा पता नहीं है और ना ही उनके फ़ोन नंबर सही हैं.

पार्टी के एक युवा कार्यकर्ता हर्षवर्धन सिंह ने अलग-अलग ट्रेनों में सफर करते समय लगभग दो हज़ार सदस्य मिस्ड कॉल के ज़रिए बनाए थे.

हर्षवर्धन एक अन्य सीनियर सदस्य जटाशंकर त्रिपाठी की टीम में थे जिनका काम रेल यात्रियों को पार्टी का सदस्य बनाना था.

जटाशंकर त्रिपाठी की टीम ने 25,000 नए सदस्य बनाए थे जिसके लिए उत्तर प्रदेश के प्रभारी ओम माथुर ने उनकी प्रशंसा भी की थी.

नाम पता अधूरा

मोबाइल उपभोक्ता

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एक मिस्ड कॉल देकर कोई भी पार्टी का सदस्य बन सकता था. बाद में उसका शहर, मोहल्ला और पिनकोड ले लिया जाता था.

कई लोगों ने अपने बारे में पूरी सूचना भी नहीं दी. उदहारण के लिए, कई व्यक्तियों ने सिर्फ मोहल्ले और ज़िले का नाम लिख कर दे दिया. जैसे, इंदिरानगर, लखनऊ.

जब ऐसे सदस्यों के मोबाइल पर बात की गई तो पता चला कि वो किसी और का है. एक व्यक्ति ने महाराजगंज, कानपुर लिख कर काम चला लिया.

ऐसे सभी सदस्यों को पार्टी का कार्यकर्ता बनाने की प्रक्रिया जून में शुरू हुई लेकिन उन कई रेल यात्रियों और अन्य सदस्यों को ढूंढना मुश्किल हो रहा है.

एक मुश्किल ये भी है कि रेल में सफर कर रहे यात्री अलग-अलग ज़िलों से थे. अब उन तक पहुंचना भी अपने आप में कठिन काम है.

ढूढ़ेंगे कैसे?

भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ता

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हर्षवर्धन मानते हैं कि इस तरह बनाए गए सदस्यों को ढूंढने में दिक्कतें आ रही थीं लेकिन "अब जल्दी ही हम सबको ढूंढ लेंगे. वो आश्वस्त हैं कि 85 - 90 प्रतिशत ऐसे सदस्यों को कार्यकर्ता बना लिया जाएगा."

वो कहते हैं, "एक हफ्ते पहले तक ऐसी स्थिति थी जिसमे लोगों से संपर्क करना मुश्किल हो रहा था, लेकिन अब हमें दिल्ली से ऐसे सभी सदस्यों का डेटाबेस मिल गया है, उनका सही पता मिल जाएगा."

क्या इसमें फ़ोन ऑपरेटर्स से मदद ली गई है?

भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ता

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इस पर पार्टी प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा कि एक या दो प्रतिशत नए सदस्यों को कार्यकर्ता बनाने में मुश्किल आएगी बाकी समस्याओं का हल निकाल लिया गया है.

पाठक ने कहा, "कई लोगों ने अपने सिम बदल लिए, कई लोग जगह छोड़ कर चले गए हैं इससे उनसे संपर्क करने में परेशानी तो हो रही थी. लेकिन अब पुराने सिम को लेते समय जो उन्होंने अपना पता दिया होगा हम उसकी मदद से उनको ढूंढ लेंगे."

लेकिन क्या ऐसे सदस्यों को ढूंढना उतना आसान होगा जैसा भाजपा के नेताओं को लग रहा है?

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