'मुंबई पीड़ित को जान से मारने की धमकी'

मार्च 1993 सिलसिलेवार बम धमाकों के दोषी याकूब मेमन को फांसी देने के बाद जहाँ समाज के विभिन्न तबकों से अलग अलग प्रतिक्रियाएं आ रही है वहीं इन धमाकों के पीड़ित मानते हैं कि आखिरकार उनके साथ न्याय हुआ है.
मुंबई के दादर इलाके के रहने वाले तुशार देशमुख ने 12 मार्च 1993 के दादर के प्लाज़ा सिनेमा के पास हुए धमाकों में उन्होंने अपनी माँ को खो दिया था.
तुशार देशमुख ने सुबह पत्रकारों से बातचीत में कहा, “आज याकूब मेमन को फाँसी के बाद लगता है कि देर से ही सही, लेकिन हमारे साथ न्याय हुआ है. मैं सुप्रीम कोर्ट का आभारी हूँ कि रात भर सुनवाई कर याकूब मेमन की क्षमादान याचिका ख़ारिज कर दी.”
अनजान नंबर से फ़ोन
गुरुवार तड़के जब सुप्रीम कोर्ट के डिवीज़न बेंच ने याकूब मेमन की क्षमादान याचिका ख़ारिज कर दी तब से तुशार कुछ हद तक राहत महसूस कर रहे हैं.
याकूब मेमन की क्षमादान याचिका ख़ारिज करने की माँग करने वाले तुशार देशमुख के मित्र और भाजपा के महाराष्ट्र उद्योग इकाई के उपाध्यक्ष अनिल गचके ने बीबीसी से बातचीत में बताया, “जब से तुशार ने याकूब मेमन की क्षमादान याचिका के खिलाफ मुहिम छेड़ी है, तब से उन्हें पाँच बार अनजान नंबर से जान से मारने की धमकी देनेवाले फोन आए हैं."
उनका दावा है कि फोन करने वाले व्यक्ति ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी है. लेकिन जान से मारने की धमकी के बाद तुशार काफी तनाव में है.
अनिल गचके ने कहा, "इसके खिलाफ हमने मुंबई के पुलिस कमिश्नर राकेश मरिया से शिकायत दर्ज की है. तुशार को पुलिस सुरक्षा मुहैया की गई है.”
गचके ने बताया कि फोन करने वाले शख्स ने तुशार से कथित तौर पर कहा कि यह मुहीम छेड़ कर तुमने अच्छा नहीं किया है और अगर याकूब को फाँसी हो जाती है, तो हम तुम्हे जान से मार देंगे.
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