बिहार में अब रिपोर्ट कार्ड पर जंग

इमेज स्रोत, MANISH SHANDILYA
- Author, मनीष शांडिल्य, नीरज सहाय
- पदनाम, पटना से, बीबीसी हिन्दी डॉट कॉम के लिए
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को ‘रिपोर्ट कार्ड-2015’ जारी किया.
लगभग पौने दो सौ पन्ने की इस रिपोर्ट में सरकार के हर विभाग के बीते 10 सालों की उपलब्धियों के बारे में विस्तार से बताया गया है.
रिपोर्ट कार्ड जारी करते हुए नीतीश कुमार ने दावा किया कि उन्होंने राज्य में क़ानून-व्यवस्था को लागू किया है और सूबे का विकास हुआ है.
रिपोर्ट कार्ड में 10 बड़े दावे

इमेज स्रोत, MANISH SHANDILYA
- बिहार पहला राज्य बना, जहां महिलाओं को पंचायत और नगर निकाय चुनाव में 50 फीसदी आरक्षण दिया गया. साथ ही शिक्षकों की नियुक्ति में भी महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण मिला. सिपाही और पुलिस अवर निरीक्षकों की सीधी बहाली में भी महिलाओं के लिए 35 फीसदी आरक्षण मिला.
- साल 2004-05 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद करीब 78 हजार करोड़ रुपए था जो साल 2014-15 में बढ़कर चार लाख करोड़ से अधिक हो गया. इस दौरान वर्तमान मूल्य पर वार्षिक औसत वृद्धि दर करीब 18 फीसदी रही.
- 2005 के मुकाबले 2015 में प्रति व्यक्ति बिजली की खपत 70 किलोवाट से बढ़कर 203 किलोवाट हो गई. 2005 में शहरों को औसतन 6 से 8 घंटे और गांवों को औसतन 2 से 3 घंटे बिजली मिलती थी. लेकिन अब यह उपलब्धता शहरों में बढ़कर 22 से 24 घंटे और गांवों में 15 से 16 घंटे हो गई है.
- साल 2005 में शिशु मृत्यु दर 61 था जो घटकर 42 रह गई है और मातृ मृत्यु दर 312 से घटकर 208 रह गई है. साल 2005 में करीब 19 फीसदी बच्चों का ही टीकाकरण हो पाता था लेकिन अब 78 प्रतिशत बच्चों का नियमित टीकाकरण होता है. बिहार में पोलियो ख़त्म किया जा चुका है. बीते चार सालों से पोलियो का एक भी नया मामला दर्ज नहीं हुआ है.
- 2005-06 के मुकाबले साल 2014-15 में चावल और गेहूं के उत्पादन में 100 फीसदी से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई है.
- साल 2005 में शिक्षकों की कुल संख्या दो लाख सात हज़ार 343 थी जो 2015 में दोगुनी से अधिक बढ़कर चार लाख 26 हज़ार 849 हो गई है.
- सूबे के किसी भी कोने से अब राजधानी पटना 6 घंटे में पहुंचा जा सकता है. अब इस समय सीमा को घटाकर 5 घंटे करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए कार्य योजना बनाई जा रही है.
- साल 2006 से अब तक मुख्यमंत्री सेतु निर्माण योजना के तहत 4689 बड़े पुल बनाए गए हैं. मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत अब तक करीब सात हज़ार किलोमीटर ग्रामीण सड़कें बनाई जा चुकी हैं.
- जनता से सीधा संवाद कायम करने और उनकी परेशानियों को दूर करने के लिए ‘जनता के दरबार में मुख्यमंत्री’ कार्यक्रम की शुरूआत की गई. 20 अप्रैल,2006 से अब तक कुल ऐसे 232 कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं और इनमें मिले दो लाख से अधिक आवेदनों का निपटारा कर दिया गया है.
- नागरिकों को तय समय में लोक सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए 15 अगस्त, 2011 में बिहार लोक सेवाओं का प्राधिकार अधिनियम लागू किया गया. इसके तहत अब तक मिले दस लाख से अधिक आवेदनों का निपटारा कर दिया गया है.
मांझी ने भी जारी किया अपना रिपोर्ट कार्ड

इमेज स्रोत, NIRAJ SAHAI
दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने भी अपने लगभग नौ महीने के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड पेश किया.
उन्होंने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार ने अपनी सरकार के 10 साल के कामकाज का जो दावा किया है वह सही नहीं है.
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने 2005 से 2013 तक राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन एनडीए की शासन की उपलब्धियों को भी अपने खाते में गिनाकर सारा श्रेय खुद लेने की कोशिश की है.
जीतन राम मांझी ने यह साबित करने की भी कोशिश की कि नीतीश कुमार एक तरफ साल 2005 के पूर्व बिहार की बदहाली और वित्तीय अराजकता का उल्लेख करते हैं.
वहीं दूसरी ओर लालू प्रसाद से मिलकर सत्ता में लौटने के लिये रिपोर्ट कार्ड के जरिये अपनी उपलब्धियां गिना रहे हैं.

इमेज स्रोत, Prashant Ravi
दो दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मंच साझा करने के बाद उत्साहित जीतन राम मांझी ने सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड के हर घर दस्तक कार्यक्रम की भी आलोचना की.
उनके अनुसार जब बगहा में पुलिस फायरिंग में आदिवासी मारे गए तब नीतीश कुमार ने किसी शोक-संतप्त परिवार के घर दस्तक नहीं दी.
सारण के स्कूल में जब ज़हरीला मध्याह्न भोजन खाने से 23 बच्चों की मौत हुई तब भी नीतीश को पीड़ित परिवारों के घर दस्तक देने की फुर्सत नहीं मिली.
हाल में जब सासाराम में दलित परिवार की बच्चियों के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ तब भी वो किसी पीड़ित के घर नहीं गए.
भाजपा ने भी जताई आपत्ति

इमेज स्रोत, Prashant Ravi
उधर भारतीय जनता पार्टी ने नीतीश सराकर के रिपार्ट कार्ड पर आपत्ति जताई है.
पार्टी का कहना है कि इन दस वर्षों के दौरान नीतीश कुमार करीब साढ़े सात साल भाजपा के सहयोग से मुख्यमंत्री रहे हैं.
ऐसे में नीतीश कुमार को दस साल नहीं बल्कि केवल बाकी के समय का रिपोर्ट कार्ड जारी करना चाहिए था.
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक क</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link>रें. आप हमें<link type="page"><caption> फ़ेसबुक </caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link>और <link type="page"><caption> ट्विटर </caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link>पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>















