जयपुर: फिर बनाए जाएंगे तोड़े गए मंदिर

जयपुर के रोजगारेश्वर मंदिर को तोड़ते मज़दूर.

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    • Author, आभा शर्मा
    • पदनाम, जयपुर से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

जयपुर में मंदिरों को तोड़े जाने के बढ़ते विरोध और चक्का जाम के बाद अब राजस्थान सरकार कुछ अति प्राचीन मंदिरों को उनके मूल स्थान पर फिर से बनवाने के लिए राजी हो गई है.

ये मंदिर कथित रूप से मेट्रो कॉरिडोर के बीच में पड़ने के कारण हटाए गए थे.

इसके लिए मंदिर संघर्ष समिति ने करीब दो हफ़्ते पहले चक्का जाम किया था. इसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का पूरा समर्थन था.

सकारात्मक परिणाम

समिति के प्रवक्ता विवेक गुप्त के मुताबिक़ इस आंदोलन का सकारात्मक परिणाम सामने आया है. सरकार के साथ संवाद से सभी मांगों पर सहमति बनी है.

जयपुर में मेट्रो रेल का निर्माण कार्य.

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शहर में पुराने मंदिर तोड़े जाने पर संघ और जनता की तीखी प्रतिक्रिया हुई थी.

समिति के संयोजक बद्री नारायण चौधरी ने बीबीसी को बताया, "समिति के सभी बिंदुओं पर सहमति बनी है पर सरकार ने उचित कार्रवाई के लिए 15 दिन का समय माँगा है.''

महादेव मंदिर

जयपुर के रोजगारेश्वर मंदिर को तोड़ते मज़दूर.

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चौधरी ने बताया कि सरकार ने अति प्राचीन 23 मंदिरों में से छोटी चौपड़ स्थित रोज़गारेश्वर महादेव मंदिर सहित 13 मंदिरों को उनके मूल स्थान पर ही तैयार करने का आश्वासन दिया है.

तोड़े गए कुल 87 मंदिरों की सूची भी सरकार ने समिति को दी है. इनमें से 23 प्राचीन मंदिर 1947 से पूर्व से प्रतिष्ठित थे. कुछ मंदिर तीन सौ साल पुराने थे.

वहीं सरकार की ओर से समिति से संवाद करने वाले सामाजिक और अधिकारिता मंत्री अरुण चतुर्वेदी मानते हैं मंदिर तोड़ना प्रशासनिक थी. जिस धर्म सम्मत विधान से मंदिरों को हटाया जाना चाहिए था, उनका पालन ठीक से नहीं हुआ किया गया. इससे जनभावनाएं आहत हुईं.

भाजपा बनाम कांग्रेस

जयपुर में मंदिरों को तोड़े जाने के विरोध में जाम लगाते लोग.

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चतुर्वेदी ने बीबीसी को बताया कि राजे सरकार देश की पहली सरकार है जो धार्मिक पर्यटन पर इतना पैसा खर्च कर रही है जिसमे मंदिर सहित उपासना के सभी केंद्र शामिल हैं.

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन में 32 मंदिर हटाए गए थे. लेकिन एक भी को फिर नहीं बनाया गया. उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने 73 हटाए गए मंदिरों में से 44 को ज़मीन दे दी है.

उन्होंने कहा कि दो मंदिरों को लेकर जनता में विशेष रोष है. सरकार सभी लोगों के साथ बैठकर निर्णय लेगी. यदि प्रशासनिक लापरवाही पाई गई तो निश्चित रूप से कार्रवाई होगी.

विवेक गुप्त का कहना है कि एक मंदिर संरक्षण समिति का गठन किया जाएगा. भविष्य में किसी भी मंदिर को स्थानान्तारित करने का काम इस समिति की पूर्व सहमति से होगा.

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