एमपी में एक और बड़ा मेडिकल प्रवेश 'घोटाला'

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- Author, राजेश चतुर्वेदी
- पदनाम, भोपाल से, बीबीसी हिंदी के लिए
मध्य प्रदेश में व्यापमं के बाद अब 'डीमेट (डेंटल एंड मेडिकल एंट्रेंस टेस्ट) घोटाला' सामने आया है.
यह मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया है और 'व्यापमं घोटाले' की तरह 'डीमेट घोटाले' की जांच सीबीआई से कराने की मांग की जा रही है.
यह 'घोटाला' सामने आया राज्य के व्यावसायिक परीक्षा मंडल में निदेशक और फिर (रिटायरमेंट के बाद) डीमेट के कोषाध्यक्ष रहे योगेश उपरीत की गिरफ़्तारी के बाद.
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'दबा रही है सरकार'
उपरीत को व्यापमं की प्रीपीजी परीक्षा में जबलपुर के एक बड़े डॉक्टर की बेटी ऋचा जौहरी को फ़र्ज़ी तरीके से पास कराने के आरोप में तीन जून को गिरफ़्तार किया गया था.

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पूछताछ में उन्होंने व्यापमं से ज़्यादा डीमेट में हुईं गड़बड़ियों के बारे में कथित रूप से राज़ खोले तो हंगामा हो गया.
प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी आरोप लगाते हैं, "डीमेट घोटाले से लाभ उठाने वालों में चूंकि भाजपा सरकार के मंत्री और बड़े अफ़सर शामिल हैं, इसीलिए अभी तक कोई जांच शुरू नहीं की गई है."
चतुर्वेदी दावा करते हैं कि उपरीत के अनुसार डीमेट घोटाला 10,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा बड़ा हो सकता है.

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इसके जवाब में भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉक्टर दीपक विजयवर्गीय ने कहा, "डीमेट मामले में सरकार ने हमेशा विधिसंगत कदम उठाए हैं. जो भी ख़बरें आ रही हैं, व्यापमं जांच से साफ़ हो जाएंगी. डीमेट मामले की व्यापमं घोटाले से अलग से जांच कराने की बात है तो शिकायत मिलने पर यह भी हो जाएगी."
<link type="page"><caption> व्यापमं घोटाला: कितनी मौतें 30, 32 या 156?</caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/india/2015/06/150602_vyapam_madhya_pradesh_graphics_rns.shtml" platform="highweb"/></link>
कैसे हुई गड़बड़?
कई सालों से मेडिकल बीट देख रहे स्थानीय पत्रकार रामगोपाल राजपूत बताते हैं कि प्राइवेट मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में मैनेजमेंट कोटे की सीटों को भरने के लिए एमपीएमडीसी (एसोसिएशन फॉर प्राइवेट मेडिकल एंड डेंटल कॉलेजेस) डीमेट कराती है.
इनमें 15 प्रतिशत सीटें एनआरआई, 43 प्रतिशत डीमेट और 42 प्रतिशत सीटें स्टेट कोटे यानी पीएमटी के ज़रिए भरी जाती हैं.

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आरोप यह है कि डीमेट में तो गड़बड़ी होती ही थी, सरकारी कोटे की सीटों को भी गलत तरीके से बेचा जाता था.
आरोप है कि निजी कॉलेज वाले डमी उम्मीदवारों का चयन डीमेट पीएमटी में करवा देते थे. बाद में इन डमी उम्मीदवारों की सीटें सरेंडर करवा दी जाती थीं. फिर खाली सीटों को वेटिंग लिस्ट के उम्मीदवारों से न भर कर, बेच दिया जाता था.
उपरीत के कथित बयानों के अनुसार हर साल लगभग 1,500 सीटों पर प्राइवेट मेडिकल कॉलेज वाले अपनी मर्ज़ी से भर्ती करते थे. इनमें बीडीएस, एमबीबीएस, एमडीएस, एमएस और एमडी की सीटें शामिल हैं.
चतुर्वेदी का दावा है कि एक उम्मीदवार से 50 लाख से डेढ़ करोड़ तक लिया जाता रहा.
कौन हैं योगेश उपरीत?

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उपरीत साल 2003 में व्यापमं के डायरेक्टर थे. दस साल तक वह डीमेट के परीक्षा नियंत्रक भी रहे.
रिटायरमेंट के बाद उपरीत ने जबलपुर में एक डेंटल कॉलेज शुरू किया.
72 साल के उपरीत एपीएमडीसी के सदस्य भी रह चुके हैं.
मध्य प्रदेश के अख़बारों के अनुसार उपरीत ने पुलिस को बताया कि बीते सालों में 'शीर्ष स्तर पर भारी लेनदेन' होता था.
एडमिशन की जांच के आदेश
प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों पर बड़े पैमाने पर कथित धांधली के आरोप लगे तो प्राइवेट कॉलेजों में एमबीबीएस सीट भरने की निगरानी कर रही अपीलेट अथॉरिटी ने प्रदेश के छह

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निजी मेडिकल कॉलेजों में साल 2010, 2011, 2012 और 2013 यानी चार सालों में 721 छात्रों को दिए दाखिले की जांच करने के लिए कहा है.
ये 721 एडमिशन स्टेट कोटे की सीटों पर कॉलेजों ने खुद ही काउंसलिंग कर भर लिए. पीएमटी पास करने वाले छात्रों को एडमिशन पाने का मौका ही नहीं मिला.
सुप्रीम कोर्ट की तरफ़ से एडमिशन के लिए तय की गई आख़िरी तारीख़ 30 सितंबर को ये दाखिले हुए.
स्टेट कोटे की 1533 सीटों में से 721 सीटें इस तरीके से आवंटित की गईं.
राज्य में सात प्राइवेट मेडिकल कॉलेज और 14 प्राइवेट डेंटल कॉलेज हैं.
इनमें एमबीबीएस की 900, एमडी व एमएस की 223, बीडीएस की 1320 और एमडीएस की 117 सीटें हैं.
कांग्रेस और भाजपा, दोनों दलों के नेता एक दूसरे के नेताओं के रिश्तेदारों के बच्चों के नाम फ़र्ज़ी तरीके से इस 'घोटाले' का लाभ लेने वालों में बताते हैं.
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