त्रिपुराः एक दिन के बच्चे को 4500 में बेचा

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- Author, सुबीर भौमिक
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
भारत के त्रिपुरा में एक आदिवासी दंपति के क़थित तौर पर ग़रीबी के कारण अपने नवजात बच्चे को बेचने का मामला सामने आया है.
त्रिपुरा के कोवाई सब-डिविज़न के मुंडा बस्ती गाँव के रहने वाले रंजीत तांती ने अपने चौथे बच्चे को उसके जन्म के एक दिन बाद ही मात्र 4500 रुपए में बेच दिया.
रंजीत कहते हैं, "जब मेरी बीवी तीन महीने के गर्भ से थी तो हमने डॉक्टर से गर्भपात के लिए संपर्क किया. लेकिन कुछ गाँव वालों को ये पता चल गया. उन्होंने हमें ऐसा करने से मना किया."
रंजीत बताते हैं, "गाँववालों ने कहा कि वो ऐसे आदमी का पता करेंगे जो बच्चे को ले लेगा और उसे एक बेहतर जीवन देगा."
इस तरह वो बच्चा लेने में रुचि रखने वालों के संपर्क में आए और आखिरकार दो जून को उन्होंने अपने बच्चे को बेच दिया.
दुख नहीं खुशी है

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रंजीत ने बीबीसी को बताया, "बुधवार को 11.20 बजे सुबह हमने बच्चा सौंप दिया. जिन्होंने मेरा बच्चा लिया वो बहुत ख़ुश थे. उन्होंने मुझे 4500 रुपए भी दिए."
अपने नवजात बच्चे को बेचने का रंजीत को कोई दुख नहीं है.
वो कहते हैं, "मुझे बुरा नहीं लग रहा. मैं खुश हूँ क्योंकि मुझे पता है कि हम उसे पालपोस नहीं पाते. वो एक संपन्न परिवार में चला गया है जहाँ वो बेहतर जीवन जिएगा. हमें उम्मीद है कि उसके पास अपनी कार और घर होंगे."
बच्चे की माँ सीमा तांती कहती हैं कि उनके लिए पाँच लोगों का परिवार चलाना असंभव था इसलिए उन्होंने अपने नवजात बच्चे को दूसरे को दे दिया.
सीमा ने बीबीसी को बताया, "हमारे पहले से तीन बच्चे हैं, चौथे को हम किसी तरह संभाल नहीं पाते."
वामपंथी शासन

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त्रिपुरा में 1993 से ही कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया(मार्क्सवादी) का शासन है.
इससे पहले भी 1978 से 1988 सीपीएम राज्य की सत्ता में रही है.
आम तौर पर हिंसा से प्रभावित पूर्वोत्तर के दूसरे राज्यों की तुलना में त्रिपुरा का विकास सूचकांक बेहतर माना जाता है.
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