'महज़ 17 रुपए में गुज़ारे' पर मजबूर

भारतीय ग़रीब
इमेज कैप्शन, भारत में ग़रीबों के आंकड़ों को लेकर विवाद होता रहता है.

भारत में इस बात को लेकर अक़सर विवाद होता है कि ग़रीबी कैसे पारिभाषित की जाए? ग़रीबी रेखा का निर्धारण कैसे हो?

सरकार और उसमें भी ख़ासकर इससे जुड़े संस्थान <link type="page"><caption> योजना आयोग</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/03/120320_montek_poverty_ia.shtml" platform="highweb"/></link> और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच हमेशा इस बात को लेकर मतभेद होते हैं कि भारत में कितने ग़रीब हैं और ग़रीबी तय करने के लिए आख़िर सही पैमाना क्या हो?

ये विवाद अपनी जगह हैं लेकिन ताज़ा सरकारी आंकड़े बताते हैं कि भारत के गाँवों में रहने वाले ग़रीब महज़ 17 रूपए और शहरों में रहने वाले ग़रीब सिर्फ़ 23 रूपए में दिन गुज़ारने के लिए मजबूर हैं.

गुरुवार को नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गेनाइज़ेशन (एनएसएसओ) ने अपने 68वें राउंड की सर्वे रिपोर्ट जारी की जिसमें जुलाई 2011 से जून 2012 के बीच सर्वेक्षण किया गया है.

एनएसएसओ के अनुसार उसका 68वाँ सर्वेक्षण 7,496 गाँवों और 5,263 शहरी इलाक़ों के कुल एक लाख एक हज़ार सात सौ चौबीस घरों के नमूने पर आधारित है.

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2011-12 के दौरान देश की पाँच फ़ीसदी सबसे <link type="page"><caption> ग़रीब</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/04/130421_poverty_world_bank_vr.shtml" platform="highweb"/></link> आबादी का औसत मासिक प्रति व्यक्ति ख़र्च ग्रामीण क्षेत्रों में 521.44 रुपए और शहरी क्षेत्रों में 700.50 रुपए रहा.

भारतीय ग़रीब
इमेज कैप्शन, लोग गांव से शहर की तरफ़ पलायन कर रहे हैं लेकिन यहां भी उन्हें नौकरी नहीं मिलती है.

दूसरी ओर सबसे अमीर भारतीयों की पांच फ़ीसद आबादी के लिए औसत मासिक प्रति व्यक्ति ख़र्च ग्रामीण इलाक़ों में 4,481 रुपए और शहरी इलाक़ों में 10,282 रुपए रहा.

खाद्य पदार्थों पर ख़र्च

रिपोर्ट के अनुसार देश भर के औसत के आधार पर ग्रामीण भारत में प्रति व्यक्ति मासिक ख़र्च 1430 रुपए और शहरों में 2630 रुपए रहा. यानी गाँवों की तुलना में शहरी क्षेत्रों में ख़र्च क़रीब 84 फ़ीसदी ज़्यादा रहा.

आमदनी के अलावा लोगों के ख़र्च करने के तौर-तरीकों में भी फ़र्क़ देखा गया है.

एनएसएसओ की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार साल 2011-12 के दौरान गाँवों में लोगों ने अपनी कुल कमाई का 52.9 फ़ीसदी हिस्सा खाने पर ख़र्च किया जिसमें अनाज पर 10.8 फ़ीसदी, दूध पर आठ फ़ीसदी और दवाओं पर सात फ़ीसदी ख़र्च शामिल है. शिक्षा पर लोगों ने केवल 3.5 फ़ीसदी ही ख़र्च किया.

शहरों में लोगों ने अपनी आमदनी का 42 फ़ीसदी हिस्सा खाने पर ख़र्च किया. इसमें सात फ़ीसदी दूध पर और 6.7 फ़ीसदी अनाज पर ख़र्च शामिल है.

शहरो में लोगों ने शिक्षा पर 6.9 फ़ीसदी ख़र्च किया.